रात्रि 10.30 बजे से 12 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त, धुरेंडी 25 मार्च को
सिवनी यशो:- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को सनातन धर्मी होली का त्यौहार बडेÞ ही उत्साह उमंग हर्ष के साथ मनाते हैं। यह होली का त्यौहार चतुर्दर्शी तिथि भद्रा व प्रतिपदा में वर्जित माना गया है। इस वर्ष भी इस त्यौहार को लेकर तरह-तरह की चर्चायें व्याप्त हैं। कुछ लोगों का मत है कि, 24 मार्च को होलिका दहन करना शुभ है, तो कुछ का कहना है कि उदया तिथि 25 मार्च को होने के कारण इस दिन होलिका दहन शुभ है। उक्ताशय की जानकारी काली चौक निवासी पं. राजेन्द्र मिश्र द्वारा दी गई है।
श्री मिश्र ने कहा कि, इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल 24 मार्च दिन रविवार को चतुर्दर्शी तिथि प्रात: 9 बजकर 12 मिनट तक विद्यमान रहेगी, उसके पश्चात पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जायेगी, जो कि 25 मार्च दिन सोमवार की प्रात: 11 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। शास्त्रकारों का मत है कि होलिका दहन के प्रमुख तीन नियम हैं, पहला फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि हो, दूसरा रात्रि का समय हो और तीसरा भद्रा समाप्त हो चुकी हो। ये तीनों नियम 24 मार्च दिन रविवार की रात्रि 10.30 बजे के पश्चात फिट बैठ रहे हैं। कारण 10.30 रात्रि को भद्रा समाप्त हो जायेगी, उसके पश्चात होलिका दहन किया जा सकता है, जबकि 25 मार्च दिन सोमवार की रात्रि को पूर्णिमा तिथि प्राप्त नही हो रही है। अत: 24 मार्च को होलिका दहन 10.30 के पश्चात एवं 25 मार्च को 11 बजकर 20 मिनट के पश्चात धुरेड़ी, फगुआ, शास्त्र समाप्त रहेगा। कारण पूर्णिमा तिथि को धुरेड़ी रंगोत्सव नहीं मनाया जाता।
श्री मिश्र ने विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि, होली हर्ष उल्लास का पर्व है। यह रंगों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आर्थात् 24 मार्च रविवार के दिन सभी हिन्दू परम्परागत स्थान पर लकडिय़ां एकत्रित करते है और शास्त्र के अनुसार 10 बजकर 30 मिनट पूजन कर वरिष्ठजनों के द्वारा ऊं होलिकायै नम: मंत्र पढ़कर अग्नि से प्रज्जवलित कर दिया जाना चाहिये। इसके पश्चात दूसरे दिन 11 बजकर 20 मिनट के पश्चात सभी रंग गुलाल एक दूसरे को लगाकर शुभकामनायें देना चाहिये, गले मिलकर गिले शिकवे दूर करना चाहिये, बैर-भाव समाप्त कर आनंद के साथ उत्सव मनाना चाहिये। फाग गायन होता है, मिठाईयां खिलायी जाती है इत्यादि। आज का दिन रंगों से सराबोर रहता है। लगभग 100 वर्ष पश्चात होलिका दहन व चंद्रग्रहण एक साथ पड़ रहा है। चंद्र ग्रहण 25 मार्च को प्रात: 10 बजकर 23 मिनट से दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा।






