2023 में सुमित मिश्रा ने धारण किया था प्रथम वर्ष महाराज श्री का स्वरूप, अमन ज्ञान प्रकाश ‘पप्पू पटेल’ और सुमित मिश्रा की रही महत्वपूर्ण भूमिका
28 अक्टूबर को रानी अवंतीबाई स्टेडियम में सजेगी भव्य भजन संध्या, किशन भगत और रुद्रकांत ठाकुर की प्रस्तुतियों से भक्तिरस में सराबोर होंगे श्रद्धालु
कैलाश सोनी वारासिवनी
वारासिवनी यशो :- आस्था जब तपस्या का रूप ले लेती है और युवा शक्ति जब सेवा एवं समर्पण को अपना ध्येय बना लेती है, तब जन्म लेती हैं ऐसी परंपराएं, जो समय के साथ नगर की धार्मिक पहचान बन जाती हैं। वारासिवनी के भव्य श्री राम मंदिर में मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति द्वारा आगे बढ़ाई जा रही धार्मिक परंपरा इसका अनूठा उदाहरण है। भगवान श्री हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा, कठिन साधना और सामूहिक समर्पण से जुड़ी यह परंपरा वर्ष 2023 में प्रारंभ हुई थी।
महाराज श्री का चोला धारण करने की विशेष साधना से लेकर शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली भव्य भजन संध्या तक, समिति के सैकड़ों युवा पूरे उत्साह के साथ धार्मिक आयोजनों को साकार करने में जुटे रहते हैं।

2023 में हुई अनूठी परंपरा की शुरुआत
वर्ष 2023 से पहले श्री राम मंदिर, वारासिवनी में दशहरा पर्व के अवसर पर यह चर्चा होती थी कि पानीपत की तर्ज पर बजरंगबली का मुकुट धारण कर महाराज श्री का स्वरूप कौन धारण करेगा। इसी विचार को साकार करने के उद्देश्य से मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति के युवाओं ने तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रदीप जायसवाल (गुड्डा भैया) के समक्ष अपनी योजना रखी और इस धार्मिक आयोजन की रूपरेखा विस्तार से प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की धार्मिक महत्ता और उसकी विशेष साधना को समझते हुए प्रदीप जायसवाल ने इस पहल में सहयोग के लिए सहमति दी। इसके बाद एक ऐसी परंपरा की नींव पड़ी, जिसमें केवल चोला धारण करना ही नहीं, बल्कि उसके लिए श्रद्धा, जप-तप, अनुशासन और पूर्ण समर्पण भी महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2023 में सुमित मिश्रा ने प्रथम महाराज श्री के रूप में चोला धारण किया। लगभग 90 दिनों की तैयारी, साधना और समर्पण के साथ प्रारंभ हुई यह पहल आगे चलकर वारासिवनी की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल हो गई।

हर वर्ष नए महाराज श्री, परंपरा वही आस्था और समर्पण की
मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति की इस परंपरा में प्रत्येक वर्ष नए युवा को महाराज श्री का स्वरूप धारण करने का अवसर मिलता रहा है।
वर्ष 2023 में सुमित मिश्रा ने प्रथम महाराज श्री के रूप में परंपरा का शुभारंभ किया। वर्ष 2024 में सौरभ सिंह चौधरी ने यह दायित्व निभाया। वर्ष 2025 में शिवम बुधरानी ने महाराज श्री का चोला धारण किया, जबकि वर्ष 2026 में दीपम शुक्ला ने पानीपत वाले हनुमान जी का चोला धारण कर महाराज श्री बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस प्रकार बीते चार वर्षों में यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही है। समिति के युवाओं की मान्यता है कि भगवान श्रीराम और श्री हनुमान जी की कृपा से यह धार्मिक परंपरा आने वाले वर्षों में भी इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी रहेगी।
शरद पूर्णिमा की भजन संध्या बनी नगर का विशेष आकर्षण
महाराज श्री का चोला धारण करने की परंपरा के साथ मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति द्वारा शरद पूर्णिमा के अवसर पर भव्य भजन संध्या का आयोजन भी किया जाता है। इस आयोजन में प्रसिद्ध भजन गायकों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को भक्तिरस से जोड़ती हैं और पूरा वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास से भर उठता है।
वर्ष 2024 में रसराज जी महाराज ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर किया था। वहीं, वर्ष 2025 में बहन अदिष्ठा एवं अनुष्का भटनागर ने अपनी भजन गायकी से वारासिवनी के श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 28 अक्टूबर 2026 को रात्रि 9 बजे वारासिवनी के रानी अवंतीबाई स्टेडियम में भव्य भजन संध्या आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर उज्जैन से पधार रहे सुप्रसिद्ध भजन गायक किशन भगत तथा बरघाट के देवी जागरण के प्रसिद्ध गायक रुद्रकांत ठाकुर अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर करेंगे।
आयोजन को लेकर समिति के युवा तैयारियों में जुटे हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
90 दिनों तक जुटे रहते हैं सैकड़ों युवा
इस धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता समिति के युवाओं की सामूहिक सहभागिता है। दशहरा पर्व के आयोजन को सफल बनाने के लिए युवा गुरुपूर्णिमा से लेकर दशहरा तक लगभग 90 दिनों तक तन-मन से जुटे रहते हैं। तैयारियों से लेकर व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा तक, प्रत्येक जिम्मेदारी को सामूहिक सहयोग से पूरा करने का प्रयास किया जाता है।
युवाओं का यह समर्पण बताता है कि धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में केवल आयोजन ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की मेहनत, अनुशासन, एकजुटता और सेवाभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को सेवा, सहयोग और भक्ति के सूत्र में जोड़ने का माध्यम भी बन गया है।
अमन ज्ञान प्रकाश ‘पप्पू पटेल’ और सुमित मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका
समिति की धार्मिक परंपरा को स्थापित करने और निरंतर आगे बढ़ाने में अमन ज्ञान प्रकाश ‘पप्पू पटेल’ तथा सुमित मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समिति की शुरुआत से ही अमन ज्ञान प्रकाश ‘पप्पू पटेल’ आयोजन की कमान संभालते हुए तैयारियों, व्यवस्थाओं और आवश्यक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनके मार्गदर्शन और सक्रियता से समिति के युवा एकजुट होकर धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने में योगदान देते हैं।
वहीं, सुमित मिश्रा का योगदान इस परंपरा की शुरुआत से जुड़ा है। वर्ष 2023 में प्रथम महाराज श्री के रूप में चोला धारण कर उन्होंने इस पहल को साकार रूप दिया। दोनों के समर्पण, सहयोग और सक्रियता ने समिति की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
युवाओं को सेवा कार्यों से जोड़ना, धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप देना और सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना इस पहल की प्रमुख विशेषताएं हैं।
हनुमान जयंती पर होगा अगले महाराज श्री का चयन
इस धार्मिक परंपरा को लेकर युवाओं में अभी से उत्साह दिखाई दे रहा है। आगामी वर्ष के लिए अगले महाराज श्री के संभावित नामों में आदित्य पटेल, ऋत्विक यादव, कीर्तन त्रिवेदी, शिखर कलिहारी और अमन पटेल शामिल बताए जा रहे हैं।
इन संभावित नामों में से अगले महाराज श्री का चयन हनुमान जयंती के दिन किया जाएगा। चयन के बाद संबंधित युवा को आगामी वर्ष में महाराज श्री का स्वरूप धारण करने का अवसर मिलेगा।
इस प्रक्रिया के माध्यम से समिति की परंपरा में नए युवाओं को जुड़ने, धार्मिक साधना के प्रति समर्पित होने और सेवा के कार्यों में भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है।
प्रदीप जायसवाल ने आमजन से की सहभागिता की अपील
पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वारासिवनी क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रदीप जायसवाल (गुड्डा भैया) ने वारासिवनी-खैरलांजी विधानसभा क्षेत्र सहित ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के आमजन से 28 अक्टूबर को आयोजित भव्य भजन संध्या में शामिल होने की अपील की है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से रात्रि 9 बजे रानी अवंतीबाई स्टेडियम, वारासिवनी पहुंचकर सुप्रसिद्ध भजन गायक किशन भगत एवं रुद्रकांत ठाकुर की भक्तिमय प्रस्तुतियों का आनंद लेने और धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने का आग्रह किया है।
मां अंजनी पुत्र सेवादल समिति की यह पहल वारासिवनी में आस्था, तपस्या, सेवा और युवा शक्ति के सामूहिक समर्पण का प्रतीक बन रही है। महाराज श्री का चोला धारण करने की साधना हो या भव्य भजन संध्या का आयोजन, इस परंपरा के केंद्र में भगवान श्रीराम एवं श्री हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और समाज को भक्ति के सूत्र में जोड़ने का भाव है। यही समर्पण इस धार्मिक परंपरा को विशिष्ट पहचान प्रदान कर रहा है।