चार मंजिला भवन में सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर रहवासी, मरम्मत पर करीब दो लाख रुपये खर्च का अनुमान; चेयरमैन मनोज पुष्प बोले—छिंदवाड़ा आकर करूंगा समीक्षा, डीन ने कहा—शासन से मांगा बजट
Chhindwara 27 October 2026
छिंदवाड़ा यशो:- मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के आवासीय परिसर में दो लिफ्ट का करीब एक साल से बंद रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चार मंजिला भवन में रहने वाले डॉक्टरों और उनके परिजनों को लिफ्ट की सुविधा नहीं मिलने से सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि लिफ्ट की मरम्मत पर लगभग दो लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया जा रहा है, लेकिन समस्या अब तक दूर नहीं हो सकी है। सवाल यह है कि जब चिकित्सा संस्थान से जुड़े आवासीय भवन में बुनियादी सुविधा बहाल करने में इतना लंबा समय लग रहा है, तो जिम्मेदारी किसकी है?
एक साल से बंद लिफ्ट, आखिर कब जागेगा प्रबंधन?
मेडिकल कॉलेज के आवासीय ब्लॉक में दो लिफ्ट लगी हैं, लेकिन दोनों के लंबे समय से बंद होने की बात सामने आई है। चार मंजिला भवन में रहने वाले लोगों को रोजाना सीढ़ियां चढ़ने-उतरने की परेशानी झेलनी पड़ रही है। बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मरम्मत का खर्च लगभग दो लाख रुपये है, तो समस्या के समाधान में करीब एक साल कैसे बीत गया? क्या बजट की कमी के कारण जरूरी सुविधा बहाल नहीं हो सकी, या प्रबंधन की प्राथमिकताओं में यह मुद्दा पीछे छूट गया? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
गर्भपात के आरोप, डीन ने किया खारिज
लिफ्ट बंद रहने के कारण सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी के बीच दो महिला डॉक्टरों के गर्भपात होने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अभय कुमार सिन्हा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सीढ़ियां चढ़ने से महिला डॉक्टरों का गर्भपात नहीं हो सकता।
इस मामले में आरोप और चिकित्सकीय तथ्य को अलग-अलग देखना आवश्यक है। गर्भपात के कारणों की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इस आरोप को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। फिर भी आवासीय परिसर में लिफ्ट बंद रहने से उत्पन्न असुविधा और सुरक्षा से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच तथा सुविधा की बहाली जरूरी है।
चेयरमैन मनोज पुष्प ने जताया आश्चर्य, बोले—छिंदवाड़ा आकर करूंगा समीक्षा
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर चेयरमैन एवं आईएएस अधिकारी मनोज पुष्प से चर्चा की गई तो उन्होंने लिफ्ट बंद रहने की जानकारी पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह छिंदवाड़ा आकर मामले की समीक्षा करेंगे।
चर्चा के दौरान मेडिकल कॉलेज से जुड़ी अन्य शिकायतों की ओर भी उनका ध्यान आकर्षित कराया गया। प्रबंधन की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर कुछ डॉक्टरों के इस्तीफा देने की बात भी सामने रखी गई। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आना शेष है।
चेयरमैन की प्रस्तावित समीक्षा से उम्मीद की जा रही है कि संस्थान की व्यवस्थाओं और लंबित समस्याओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
डीन बोले—शासन से मांगा बजट, जल्द ठीक होगी लिफ्ट
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अभय कुमार सिन्हा ने स्वीकार किया कि आवासीय परिसर की लिफ्ट खराब है। उनके अनुसार, इसकी मरम्मत पर लगभग दो लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसके लिए शासन से बजट मांगा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लिफ्ट जल्द ठीक कराई जाएगी।
अब सवाल यह है कि बजट कब स्वीकृत होगा, मरम्मत का काम कब शुरू होगा और दोनों लिफ्ट दोबारा कब चालू होंगी? केवल बजट मांगने और जल्द सुधार का आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। रहवासियों को सुविधा मिलने के बाद ही व्यवस्था में सुधार का वास्तविक असर दिखाई देगा।
दो लाख रुपये की मरम्मत के लिए एक साल का इंतजार क्यों?
मेडिकल कॉलेज के आवासीय परिसर की यह समस्या प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ी है। यदि मरम्मत के लिए बजट आवश्यक है, तो उसके लिए समयबद्ध प्रयास और नियमित फॉलोअप भी जरूरी हैं। एक साल तक लिफ्ट बंद रहने से न केवल रोजमर्रा की सुविधा प्रभावित होती है, बल्कि संस्थान के रखरखाव और प्रशासनिक तत्परता पर भी सवाल उठते हैं।
अब निगाहें चेयरमैन मनोज पुष्प की समीक्षा और शासन से मांगे गए बजट पर हैं। देखना होगा कि छिंदवाड़ा पहुंचकर समीक्षा करने का आश्वासन समस्या के ठोस समाधान में कब बदलता है और आवासीय परिसर की दोनों लिफ्ट वास्तव में कब चालू होती हैं।