मशरूम उगाने से अगरबत्ती बनाने तक का प्रशिक्षण, वन धन केंद्र में समझे कारोबार के गुर; वन संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता की नई राह
Mandla 27 October 2026
मंडला/लखनादौन यशो:- जंगल की पहचान अब केवल वन्यजीवों और हरियाली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यही जंगल स्थानीय परिवारों की आजीविका का सहारा भी बन सकता है। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में रहने वाले समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत उप वनमंडल मलाजखंड की ईको विकास समितियों के 35 सदस्यों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए रास्तों से परिचित कराया गया।

23 एवं 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने जाना कि मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती निर्माण, आंवला प्रसंस्करण और औषधीय पौधों की खेती जैसे काम स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर कैसे बन सकते हैं। प्रशिक्षण के लिए सदस्यों को लखनादौन एवं शिकारा स्थित प्रसंस्करण केंद्रों में भेजा गया, जहां उन्हें उत्पाद तैयार करने से लेकर उनकी पैकेजिंग और विपणन तक की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
जंगल के संसाधनों से तैयार होंगे रोजगार के अवसर
इस प्रशिक्षण की खास बात यह रही कि इसमें केवल पारंपरिक जानकारी तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय संसाधनों को उपयोगी उत्पादों में बदलने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि उचित प्रशिक्षण, कौशल और बाजार की समझ के माध्यम से छोटे-छोटे उद्यम भी आय के नए साधन बन सकते हैं।
मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती निर्माण, आंवला संग्रहण एवं प्रसंस्करण और औषधीय पौधों की खेती जैसे कार्य ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

वन धन केंद्र में समझा कमाई का पूरा गणित
प्रशिक्षण के दौरान सदस्यों ने वन धन केंद्र का भ्रमण किया। यहां उन्होंने वन आधारित लघु उद्यमों, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और उत्पादों के विपणन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की।
किसी उत्पाद को तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, उचित मूल्य और बाजार तक पहुंच भी उसकी सफलता तय करते हैं। प्रशिक्षण में इन पहलुओं की जानकारी देना प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से स्वरोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।
गोपाल सिंह ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर गोपाल सिंह, सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक एवं पूर्व परिक्षेत्र अधिकारी, लखनादौन द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ईको विकास समिति सदस्यों के कौशल को विकसित करना, स्थानीय वन संसाधनों पर आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
वन भी सुरक्षित रहें और परिवारों की आमदनी भी बढ़े
वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों की आर्थिक मजबूती वन संरक्षण के प्रयासों को भी सहारा दे सकती है। जब स्थानीय लोगों के पास आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध होते हैं, तब प्रकृति और वन संसाधनों के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास के अवसर तलाशना आसान हो सकता है।
कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में आयोजित यह प्रशिक्षण इसी सोच को आगे बढ़ाने वाली पहल है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण प्राप्त 35 सदस्य सीखे गए कौशल को कितनी प्रभावी तरह से स्वरोजगार में बदल पाते हैं और उन्हें नियमित आमदनी के अवसर कितने उपलब्ध हो पाते हैं।
अब उम्मीद यही है कि प्रशिक्षण में सीखे गए हुनर केवल जानकारी बनकर न रह जाएं, बल्कि स्थानीय परिवारों की आमदनी बढ़ाने और वन संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनें।