नशा मुक्ति के नाम पर 50-50 की वसूली !
अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद सीईओ ने जारी किया आदेश, ग्रामीणों में असमंजस
Seoni 21 December 2025
बरघाट (सिवनी) यशो:- जनपद पंचायत बरघाट में इन दिनों प्रशासनिक तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जहां जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आभा जितेन्द्र राहांगडाले ने सोशल मीडिया के माध्यम से आम जनता को चेतावनी जारी करते हुए नशा मुक्ति के नाम पर घर-घर नंबर प्लेट लगाकर 50-50 रुपये की अनुचित वसूली से सावधान रहने को कहा है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा बाकायदा आदेश जारी कर प्रति मकान 50 रुपये लेकर नंबर प्लेट लगाने की अनुमति दी गई है।

अध्यक्ष का स्पष्ट संदेश — झांसे में न आएं, शिकायत करें
जनपद अध्यक्ष श्रीमती आभा राहांगडाले ने अपने सार्वजनिक संदेश में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति नशा मुक्ति या किसी अन्य योजना के नाम पर गांवों में जाकर घरों पर प्लेट लगाकर पैसे मांगता है, तो लोग उससे सावधान रहें और ऐसे मामलों की शिकायत थाने या 100 नंबर पर करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्रवासियों से शिकायत मिलते ही उन्होंने इस विषय पर जनपद सीईओ के समक्ष असहमति दर्ज कराई है।

सीईओ का आदेश — 50 रुपये लेकर प्लेट लगाने की अनुमति
वहीं दूसरी ओर, कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बरघाट द्वारा जारी आदेश (पत्र क्रमांक क/127/पचा प्रको/ज.प./2025) में ग्राम पंचायत गांगपुर सहित अन्य ग्रामों में
सामाजिक न्याय विभाग की योजनाओं
कन्या विवाह/निकाह योजना
सामाजिक सुरक्षा पेंशन
लाड़ली बहना योजना
नशा मुक्ति प्रचार
के लिए मकान मालिक की सहमति से 50 रुपये प्राप्त कर नंबर प्लेट लगाने की बात स्पष्ट रूप से लिखी गई है।
इतना ही नहीं, आदेश में एक निजी व्यक्ति हरिश्चंद्र प्रसाद शाह को नंबर प्लेट लगाने के लिए अधिकृत किया गया है तथा सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और कोटवार को सहयोग के निर्देश दिए गए हैं।
विरोधाभास या प्रशासनिक भ्रम?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि —
यदि यह कार्य वैधानिक और विभागीय योजना के अंतर्गत है, तो जनपद अध्यक्ष इसे अनुचित वसूली क्यों बता रही हैं?
और यदि वसूली गलत है, तो सीईओ द्वारा लिखित आदेश कैसे जारी किया गया?
क्या जनपद पंचायत अध्यक्ष को विश्वास में लिए बिना यह निर्णय लिया गया?
कलेक्टर से लेकर थाने तक को भेजी गई प्रतिलिपि
सीईओ के आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर,
जिला पंचायत सीईओ,
उप संचालक सामाजिक न्याय विभाग,
तहसीलदार,
परियोजना अधिकारी और थाना प्रभारी तक भेजी गई है,
इसके बावजूद अध्यक्ष की सार्वजनिक आपत्ति ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
जनता के बीच बढ़ा असमंजस
एक ही जनपद में दो जिम्मेदार पदों से दो विपरीत संदेश जाने से ग्रामीणों में भ्रम और असमंजस की स्थिति है।
यह साफ संकेत है कि बरघाट जनपद पंचायत में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा,
और आंतरिक समन्वय की कमी अब सार्वजनिक बहस का विषय बन चुकी है।
अब देखना यह होगा कि —
👉 प्रशासन इस विरोधाभास को कैसे स्पष्ट करता है
👉 50 रुपये की वसूली वैध है या नहीं
👉 और जिम्मेदारी किसकी तय होती है



