जीएसटी एंटी इवेजन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, दो फर्मों ने 1.50 करोड़ से अधिक किया सरेंडर
हर्ष कंस्ट्रक्शन व वैनगंगा कंस्ट्रक्शन में चार साल के रिकॉर्ड खंगाले, दस्तावेज जब्त
बालाघाट यशै:- जिले में जीएसटी एंटी इवेजन ब्यूरो द्वारा की गई दो दिवसीय सघन कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र की दो प्रमुख फर्मों — हर्ष कंस्ट्रक्शन और वैनगंगा कंस्ट्रक्शन — ने टैक्स से जुड़ी अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभाग के समक्ष सरेंडर कर दी है। यह कार्रवाई जिले में अब तक की सबसे बड़ी जीएसटी जांचों में से एक मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, हर्ष कंस्ट्रक्शन ने लगभग 70 लाख रुपये जबकि
वैनगंगा कंस्ट्रक्शन ने करीब 80 लाख रुपये से अधिक की राशि जीएसटी विभाग को जमा कराई है।
यह भुगतान आंशिक रूप से नकद तथा आंशिक रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एडजस्टमेंट के माध्यम से किया गया है।
चार वर्षों के बिल, रिटर्न और ई-वे बिल की हुई गहन जांच
जबलपुर स्थित जीएसटी कार्यालय से आई एंटी इवेजन टीम ने दोनों फर्मों के पिछले चार वर्षों के बिल, खरीद-बिक्री रजिस्टर, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न और आईटीसी क्लेम से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की।
प्रारंभिक पड़ताल में कई मामलों में टैक्स में अंतर, संदिग्ध लेन-देन और आईटीसी के असामान्य क्लेम सामने आए,
जिसके बाद विभाग ने फर्मों पर दबाव बढ़ाया और अंततः सरेंडर की कार्रवाई हुई।
डिजिटल रिकॉर्ड जब्त, फॉरेंसिक जांच होगी
कार्रवाई के दौरान टीम ने हर्ष कंस्ट्रक्शन से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किए हैं, जिन्हें आगे की जांच के लिए जबलपुर ले जाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, इन रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जाएगी
ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टैक्स संबंधी अनियमितताएं जानबूझकर की गईं या फिर तकनीकी त्रुटियों का परिणाम थीं।
यदि जांच में यह साबित होता है कि टैक्स चोरी सुनियोजित तरीके से की गई है,
तो संबंधित फर्मों पर भारी जुर्माना, पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।

फर्जी बिलिंग और खर्च बढ़ाकर दिखाने की आशंका
जानकार सूत्रों का दावा है कि एंटी इवेजन ब्यूरो को टैक्स चोरी से जुड़े ठोस इनपुट मिलने के बाद ही यह कार्रवाई की गई।
आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्यों में खर्च बढ़ाकर दिखाने,
फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग से जुड़ी अनियमितताएं हो सकती हैं,
हालांकि इन बिंदुओं पर विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक हलचल, जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
कार्रवाई की एक अहम वजह यह भी है कि दोनों में से एक फर्म का संबंध सत्ताधारी दल से जुड़े नेता से बताया जा रहा है।
ऐसे में जिले के राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है।
स्थानीय स्तर पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि-
यह जांच केवल बालाघाट तक सीमित नहीं रहेगी,
बल्कि इससे जुड़े अन्य प्रोजेक्ट्स और निर्माण फर्में भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
अंतिम आंकड़ा जांच के बाद होगा स्पष्ट
जीएसटी अधिकारियों ने अब तक संभावित कुल टैक्स चोरी की राशि को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।
विभाग का कहना है कि-
पूरी जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी,
और उसी आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दस्तावेजों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई जाती हैं,
तो संबंधित फर्मों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की भी पूरी संभावना है।
फिलहाल दोनों फर्मों पर अलग-अलग टीमों द्वारा जांच जारी है और पूरे मामले पर जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर तक निगरानी रखी जा रही है।



