पानी के लिए सड़कों पर उतरे ग्रामीण: चंडी गांव में 3 घंटे चक्का जाम, प्रशासन के आश्वासन पर खुले रास्ते
खाली बर्तन लेकर पहुंचे ग्रामीण, फ्लोराइडयुक्त पानी से परेशान—पेयजल संकट पर फूटा गुस्सा
चंडी गांव पानी समस्या – ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा
Seoni 29 March 2026
छपारा यशो:- सिवनी जिले के छपारा क्षेत्र अंतर्गत लंबे समय से चंडी गांव पानी समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खाली बर्तन लेकर भीमगढ़-छपारा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 3 घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा।

सुबह 10 बजे से शुरू हुआ जाम
नगर से लगभग 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत अंजनिया के अंतर्गत चंडी और भरिया टोला सहित चंडी गांव पानी समस्या को लेकर आसपास के गांवों के लोग सुबह करीब 10 बजे एकत्रित हुए और सड़क पर बैठकर चक्का जाम कर दिया।
ग्रामीणों ने मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर लंबी कतारें लग गईं।
पुलिस पहुंची, लेकिन नहीं माने ग्रामीण
सूचना मिलते ही छपारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की मांग पर अड़े रहे।
उन्होंने साफ कहा कि ठोस कार्रवाई के बिना वे सड़क से नहीं हटेंगे।
अधिकारियों के आश्वासन पर समाप्त हुआ जाम
करीब तीन घंटे बाद नायब तहसीलदार रामसेवक कौल और पीएचई विभाग की प्रभारी एसडीओ श्रीमती ज्ञानेश्वरी उईके मौके पर पहुंचीं।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पहले से गुजर रही पाइपलाइन के माध्यम से जल्द पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्ताव भेजकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
इसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर मार्ग खोल दिया।
फ्लोराइडयुक्त पानी से बिगड़ रही सेहत
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लगे हैंडपंपों से फ्लोराइड युक्त पानी निकल रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
चुनाव बहिष्कार के बावजूद नहीं सुधरी स्थिति
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पेयजल संकट को लेकर पूर्व में कई चुनावों का बहिष्कार भी किया, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
जनहित का बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करती है।





