शहादत के 14 साल बाद भी सम्मान की बाट जोह रहा छपारा का लाल
22 फरवरी को मनाया जाएगा शहीद अंकित कोष्टा का 14वां शहीद दिवस
Seoni 18 February 2026
सिवनी यशो:-देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों को याद रखना समाज और प्रशासन का परम कर्तव्य है, लेकिन छपारा नगर की धरा में जन्मे शहीद अंकित कुमार कोष्टा के मामले में स्थिति इसके विपरीत है। शहादत के 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके गृह नगर छपारा में न तो कोई भव्य स्मारक बना और न ही कोई स्थायी पहचान।

अधूरी श्रद्धांजलि, अधूरी जिम्मेदारी
हर वर्ष आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में पुष्प अर्पित कर प्रशासन अपने दायित्वों की इतिश्री कर लेता है, जबकि शहीद की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
2012 में देश की रक्षा करते हुए हुए शहीद
वर्ष 22-23 फरवरी 2012 की रात, जम्मू और कश्मीर के डाबर सेक्टर में आए भीषण बर्फीले तूफान के दौरान देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए छपारा का यह लाल 17 अन्य जवानों के साथ वीरगति को प्राप्त हुआ। आज उनकी शहादत को 14 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उनके नाम पर कोई स्थायी स्मारक नहीं है।
अधूरा स्मारक, अधूरी कहानी
वर्ष 2023 में *आजादी का अमृत महोत्सव* के तहत चमारी मार्ग तिराहा पर शहीद अंकित कोष्टा की स्मृति में स्मारक बनाए जाने की औपचारिकता निभाई गई, लेकिन यह स्मारक आज जीर्ण-शीर्ण और अधूरी अवस्था में उपेक्षित पड़ा है। यह हालात तत्कालीन नगर पंचायत और वर्तमान नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
संक्षिप्त परिचय एवं शहादत
- जन्म: 11 जुलाई 1986
- सेवा में भर्ती: वर्ष 2005
- काडर: ईएमई (टेक्निकल विभाग)
- सेवा: भारतीय सेना
- शहादत: वर्ष 2012, डाबर सेक्टर
- अंतिम संस्कार: 27 फरवरी 2012, जबलपुर (पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ)
प्रशासनिक उपेक्षा से बढ़ता आक्रोश
स्थानीय नागरिकों और शहीद के परिजनों में रोष है कि इतने वर्षों बाद भी न तो नगर परिषद और न ही जिला प्रशासन ने शहीद के सम्मान में कोई ठोस कदम उठाया। लोग मांग रहे हैं कि शहीद की स्मृति में स्थायी स्मारक बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
जनसुनवाई में उठ चुकी मांग
जिला सिवनी कलेक्टर के समक्ष आयोजित जनसुनवाई में सिवनी कोष्टा समाज के संरक्षक पूनाराम कुल्हाड़े द्वारा यह मांग रखी ग
ई कि छपारा नगर में औषधि वाटिका और अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र शहीद अंकित कोष्टा की स्मृति और सम्मान में स्थापित किए जाएँ।



