तीन सदस्यों वाली भाजपा के सामने 16 सदस्यों का दावा भी नहीं आया काम, मालती डहेरिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिरा; कांग्रेस और गोंडवाना अब तलाश रहे सेंधमारी का राज
Seoni, 27 October 2026
सिवनी यशो:- जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डहेरिया के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की विफलता अब भले ही पुराना राजनीतिक घटनाक्रम हो, लेकिन इसके पीछे की रणनीति आज भी सिवनी की सियासत में चर्चा का विषय है। इस पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और भाजपा जिला महामंत्री मुकेश बघेल की रणनीतिक भूमिका को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। आखिर भाजपा के पास महज तीन सदस्य होने के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि 16 सदस्यों के समर्थन का दावा करने वाला विपक्ष अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सका?

यह सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव गिरने की कहानी नहीं थी, बल्कि संख्या बल के भरोसे बैठी कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राजनीतिक आकलन पर लगा बड़ा सवालिया निशान भी था।
16 के दावे के सामने भाजपा के तीन सदस्य, फिर भी नहीं डिगी कुर्सी!
जिला पंचायत के समीकरणों में कांग्रेस के 11 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पांच सदस्यों का आंकड़ा सामने था। दूसरी तरफ भाजपा के पास केवल तीन सदस्य बताए जा रहे थे। अविश्वास प्रस्ताव गिराने के लिए कम से कम पांच मतों की जरूरत के दावे के बीच भाजपा की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही थी।

राजनीतिक चर्चाओं में अध्यक्ष श्रीमती मालती डहेरिया की कुर्सी पर संकट लगभग तय माना जा रहा था। विपक्ष को अपने संख्याबल पर भरोसा था, जबकि भाजपा के सामने दो अतिरिक्त मतों का समर्थन हासिल करने की चुनौती थी। लेकिन परिणाम ने सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया।
यही वह मोड़ था, जहां फग्गन सिंह कुलस्ते और मुकेश बघेल की रणनीति चर्चा के केंद्र में आ गई।
कुलस्ते का राजनीतिक अनुभव, बघेल की जमीनी सक्रियता!
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का लंबा राजनीतिक अनुभव और भाजपा जिला महामंत्री मुकेश बघेल की संगठनात्मक सक्रियता इस घटनाक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव की चुनौती को देखते हुए पहले से रणनीतिक तैयारी की गई थी।
मुकेश बघेल का मतदान से पहले यह दावा करना कि अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिरेगा, उस समय विपक्ष के लिए चौंकाने वाला था। कारण साफ था—एक ओर कांग्रेस और गोंडवाना के सदस्यों को एकजुट रखने के प्रयास किए जा रहे थे, तो दूसरी ओर भाजपा की सदस्य संख्या इतनी कम थी कि उसके दावे पर सहज विश्वास करना मुश्किल था।
लेकिन नतीजा आया तो बघेल का दावा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। अब सवाल यह है कि क्या यह पहले से तैयार की गई रणनीति का परिणाम था, पर्दे के पीछे हुए राजनीतिक समन्वय का असर था या विपक्ष अपने ही समीकरणों का सही आकलन नहीं कर पाया?
कांग्रेस की किलेबंदी के बावजूद कैसे बिगड़ा पूरा गणित?
अविश्वास प्रस्ताव की तारीख घोषित होने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष नरेश मरावी और जिला प्रभारी, परासिया विधायक सोहनलाल बाल्मीकि द्वारा सदस्यों को एकजुट रखने के प्रयासों की चर्चा रही। केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह सहित कांग्रेस के कई नेता मतदान स्थल पर मौजूद थे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं की उपस्थिति भी बताई गई।
इसके उलट, भाजपा की ओर से जिला महामंत्री मुकेश बघेल और अध्यक्ष के पति मुकेश डहेरिया की मौजूदगी प्रमुख रूप से दिखाई दी। नेताओं की संख्या और राजनीतिक जमावड़े के लिहाज से मुकाबले की तस्वीर विपक्ष के पक्ष में नजर आ रही थी। फिर भी अविश्वास प्रस्ताव का विफल होना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर बन गया।
कांग्रेस और गोंडवाना के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि जिस समर्थन को लेकर भरोसा जताया जा रहा था, वह अंतिम परिणाम में निर्णायक क्यों नहीं बन पाया। हालांकि, वास्तविक मतदान और सदस्यों के रुख की आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी सदस्य पर पक्ष बदलने या भीतरघात का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
सेंधमारी का रहस्य अब भी राजनीतिक चर्चा का विषय
इस घटनाक्रम के बाद सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि भाजपा को जरूरी समर्थन आखिर कैसे मिला। क्या फग्गन सिंह कुलस्ते और मुकेश बघेल ने पहले ही ऐसा राजनीतिक समीकरण तैयार कर लिया था, जिसका अंदाजा विपक्ष को नहीं हुआ? क्या सदस्यों के रुख को लेकर कांग्रेस और गोंडवाना का आकलन गलत साबित हुआ? या फिर मतदान के वास्तविक गणित में कोई ऐसा पहलू था, जो राजनीतिक दावों में सामने नहीं आया?
इन सवालों का निर्णायक उत्तर आधिकारिक मतदान विवरण और संबंधित पक्षों की पुष्टि से ही मिल सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि इस परिणाम ने संख्या बल को ही जीत की गारंटी मानने वाली राजनीतिक सोच को चुनौती दी।
मालती डहेरिया की कुर्सी बची, रणनीतिकारों की चर्चा तेज
अविश्वास प्रस्ताव गिरने से जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डहेरिया पद पर बनी रहीं। उनके पति मुकेश डहेरिया की सक्रियता भी घटनाक्रम के दौरान चर्चा में रही। वहीं भाजपा के भीतर फग्गन सिंह कुलस्ते और मुकेश बघेल की भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा होती रही।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि राजनीति में केवल सदस्यों की संख्या गिनना पर्याप्त नहीं होता; वास्तविक समर्थन, संगठनात्मक समन्वय और रणनीति का आकलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दैनिक यशोन्नति का राजनीतिक विश्लेषण: सिवनी जिला पंचायत का यह घटनाक्रम भाजपा के सीमित संख्याबल और विपक्ष के बड़े दावों के बीच हुए अप्रत्याशित परिणाम के कारण याद किया जाएगा। फग्गन सिंह कुलस्ते के राजनीतिक अनुभव और मुकेश बघेल की सक्रियता को लेकर उठी चर्चा ने इस प्रकरण को और दिलचस्प बना दिया। लेकिन इस सियासी उलटफेर की पूरी पटकथा और कथित सेंधमारी का वास्तविक रहस्य तभी खुलेगा, जब मतदान का ठोस गणित और संबंधित पक्षों की पुष्टि सामने आएगी।