CM डॉ. मोहन यादव ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार: 25 हजार लीटर पानी, टूटी मशीनें… फिर भी बन गई MP की सबसे कठिन टनल
18 साल की चुनौती पर मिली जीत, 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन तक पहुंचेगा नर्मदा का जल; विंध्य-महाकौशल की बदलेगी तकदीर
स्लीमनाबाद टनल: 25 हजार लीटर पानी, टूटी मशीनें… फिर भी बन गई MP की सबसे कठिन टनल
Bhopal 17 July 2026
कटनी/भोपाल यशो:-कल्पना कीजिए… आप जमीन से 120 फीट नीचे हैं। चारों ओर अंधेरा है। सामने संगमरमर जैसी कठोर चट्टानें हैं। अचानक हर मिनट 25 हजार लीटर पानी का तेज बहाव रास्ता रोक देता है। नीचे की मिट्टी कभी भी धंस सकती है। करोड़ों रुपये की विदेशी मशीन टूट जाती है। ऊपर से रेलवे लाइन और नेशनल हाईवे पर सामान्य आवाजाही जारी है, जबकि ठीक उसके नीचे इंजीनियर मौत से मुकाबला करते हुए सुरंग खोद रहे हैं।

यह किसी हॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सबसे चुनौतीपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद टनल की वास्तविक कहानी है। लगभग 18 वर्षों के संघर्ष, असंख्य तकनीकी चुनौतियों और हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों तथा श्रमिकों की अथक मेहनत के बाद यह ऐतिहासिक परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले में पहुंचकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया और इसे प्रदेश के कृषि इतिहास की दिशा बदलने वाला प्रोजेक्ट बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि विंध्य और महाकौशल के लाखों किसानों की नई उम्मीद है। जब इस टनल से नर्मदा का पानी सोन नदी बेसिन तक पहुंचेगा, तब कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित पूरे क्षेत्र में सिंचाई की तस्वीर बदल जाएगी।
जहां पहाड़ ने रोकी राह, वहां विज्ञान ने बनाया रास्ता
स्लीमनाबाद टनल को इंजीनियरिंग का चमत्कार यूं ही नहीं कहा जाता। लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग को विंध्य पर्वतमाला के भीतर बनाना देश की सबसे कठिन परियोजनाओं में शामिल रहा।
निर्माण के दौरान इंजीनियरों को संगमरमर, लाइमस्टोन, डोलोमाइट और विशाल भूमिगत गुफाओं जैसी जटिल भौगोलिक संरचनाओं का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर पानी का दबाव इतना अधिक था कि खुदाई के साथ ही टनल में हर मिनट करीब 25 हजार लीटर पानी भरने लगता था।

स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि शुरुआती दौर में उपयोग की जा रही अमेरिकी मशीन भी लगातार दबाव और कठोर चट्टानों के कारण क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जर्मनी से अत्याधुनिक Herrenknecht मशीन मंगाई गई। विशेष ग्राउटिंग तकनीक अपनाकर जल रिसाव रोका गया और फिर धीरे-धीरे सुरंग निर्माण आगे बढ़ सका।
टनल के अंदर हर मिनट मौत से मुकाबला
🔴 हर मिनट 25 हजार लीटर पानी का तेज बहाव
🔴 जमीन के भीतर विशाल प्राकृतिक गुफाएं
🔴 अचानक धंसने वाली मिट्टी
🔴 अमेरिकी मशीन हुई क्षतिग्रस्त
🔴 जर्मनी से मंगानी पड़ी नई मशीन
🔴 120 फीट नीचे लगातार निर्माण कार्य
🔴 ऊपर रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे
🔴 फिर भी नहीं रुका निर्माण
18 साल में पूरा हुआ सपना
इस परियोजना का अनुबंध वर्ष 2008 में हुआ। प्रारंभिक लागत करीब 799 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, नई-नई तकनीकी चुनौतियां सामने आती गईं।
2015 तक सुरंग की प्रगति बेहद धीमी रही। इसके बाद आधुनिक तकनीक अपनाई गई और 2016 से निर्माण कार्य में तेजी आई।
वर्ष 2023 में सरकार बदलने के बाद परियोजना फिर संकट में आ गई। ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए। मशीनें पुरानी हो चुकी थीं। लेकिन राज्य सरकार ने परियोजना को बंद नहीं होने दिया और निर्माण कार्य लगातार जारी रखा।
आज इस परियोजना का 96 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है।
🟥 टाइमलाइन
2008 – परियोजना का अनुबंध
2015 – केवल 1406 मीटर खुदाई
2016 – जर्मन मशीन से निर्माण में तेजी
2023 – ठेकेदार संकट, मशीनें पुरानी
2026 – परियोजना अंतिम चरण में
120 फीट नीचे से बहेगी नर्मदा
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नर्मदा का पानी किसी पंप या बिजली की मदद से नहीं, बल्कि केवल गुरुत्वाकर्षण के सहारे सोन नदी बेसिन तक पहुंचेगा।
10.14 मीटर व्यास वाली यह सुरंग भविष्य में भारत की सबसे महत्वपूर्ण ग्रेविटी आधारित सिंचाई परियोजनाओं में गिनी जाएगी।
स्लीमनाबाद टनल एक नजर में
📍 लंबाई : 11.952 किलोमीटर
📍 लागत : 1610.47 करोड़ रुपये
📍 निर्माण अवधि : 18 वर्ष
📍 गहराई : 120 फीट तक
📍 व्यास : 10.14 मीटर
📍 प्रभावित गांव : 1450
📍 सिंचाई : 2.45 लाख हेक्टेयर
📍 जिले : कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना
📍 तकनीक : Herrenknecht जर्मन मशीन
📍 आयु : 100 वर्ष से अधिक
मुख्यमंत्री बोले— पंजाब-हरियाणा जैसी होगी खेती
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी कृषि भूमि न बेचें।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यही क्षेत्र कृषि उत्पादन में नया इतिहास रचेगा।
उन्होंने कहा—
“यह परियोजना केवल पानी नहीं पहुंचाएगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाएगी, पलायन रोकेगी और पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल देगी।”
क्या बदलेगा?
* रबी और खरीफ दोनों मौसम में सिंचाई
* सूखी जमीन होगी उपजाऊ
* भूजल स्तर में सुधार
*पेयजल संकट में राहत
* रोजगार के नए अवसर
* कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा
* पलायन में कमी
*किसानों की आय में वृद्धि
1450 गांवों तक पहुंचेगा जीवन
टनल चालू होने के बाद बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से नर्मदा का पानी कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के लगभग 1450 गांवों तक पहुंचेगा।
करीब 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि स्थायी सिंचाई के दायरे में आएगी। इसके अलावा जल संसाधन विभाग की लगभग 30 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त परियोजनाओं को भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
🟥 10 वजहें, क्यों खास है यह टनल
* मध्यप्रदेश की सबसे कठिन सिंचाई सुरंग
* 18 साल का निर्माण संघर्ष
*25 हजार लीटर प्रति मिनट जल रिसाव पर विजय
*विदेशी तकनीक का उपयोग
*120 फीट नीचे निर्माण
* 100 साल तक सुरक्षित रहने का दावा
* बिना बिजली के पानी का प्रवाह
*1450 गांवों को लाभ
*2.45 लाख हेक्टेयर सिंचाई
* विंध्य और महाकौशल की अर्थव्यवस्था बदलने की क्षमता
स्लीमनाबाद टनल केवल कंक्रीट और चट्टानों से बनी सुरंग नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के सपनों का रास्ता है। जिन पहाड़ों को कभी अभेद्य माना जाता था, आज वहीं से नर्मदा का जल नई उम्मीद बनकर निकलेगा।
यदि परियोजना निर्धारित समय पर पूरी तरह क्रियाशील हो जाती है, तो यह आने वाले दशकों तक विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि, अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास की दिशा तय करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी।
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