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करोडो की सड़क नहीं, भ्रष्टाचार ,ठेकेदार की दबंगाई और सिस्टम की कमजोरी का प्रदर्शन
11 और 9 करोड़ की दो सड़क परियोजनाओं में भारी भ्रष्टाचार (Corruption) का खुलासा, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से तंत्र बेनकाब
Seoni 08 June 2025
सिवनी यशो:- सिवनी जिले की दो प्रमुख सड़क परियोजनाएं – डोभ-खरसारू मार्ग और केवलारी-उगली मार्ग – अब जन सुविधा नहीं, जनसंघर्ष बन गई हैं। करोड़ों की लागत से बन रही ये सड़कें गुणवत्ता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के हर मानक पर असफल साबित हो रही हैं।
जांच और दस्तावेज़ों के अनुसार, इन दोनों परियोजनाओं में घटिया सामग्री, नियमों की अनदेखी, दस्तावेजों की फर्जीवाड़ा और ईमानदार अधिकारियों के दमन जैसे कई संगीन आरोप सामने आए हैं।
डोभ-खरसारू सड़क: निर्माण के नाम पर घोटाले की मजबूत नींव, इस 11 करोड़ की सड़क में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं
पुलियों में जहां एम 20 ग्रेड कंक्रीट होना था, वहां मोरम और पत्थर भर दिए गए। टेढ़ी-मेढ़ी दीवारें, खराब फिनिशिंग और अधूरी ढलाई स्पष्ट रूप से मानक की अनदेखी को दर्शाती हैं। पेवर ब्लॉकों में एम 30 के स्थान पर एम 10 ग्रेड की सामग्री का प्रयोग किया गया। लैब टेस्ट में ब्लॉक पूरी तरह असफल, मजबूती 200 प्रतिशत तक कम पाई गई। इसके बावजूद, ना तो काम रोका गया, न ही किसी ठेकेदार पर कार्रवाई हुई।
फर्जी दस्तावेज और मिक्स प्लांट की ‘फोटोशॉप्ड कहानी
सड़क निर्माण के दौरान बेटर मिक्स प्लांट का प्रयोग अनिवार्य था, लेकिन ठेकेदार ने फील्ड में फ्यूरी मशीन से काम कराया। इसके बावजूद, फर्जी दस्तावेजों और फोटो के सहारे मिक्स प्लांट की झूठी पुष्टि कर दी गई। पूर्व एसडीओ शिवशंकर चौकसे ने माप पुस्तिका में साफ लिखा कि साइट पर प्लांट मौजूद नहीं था। लेकिन इस तथ्य को दबा दिया गया।
एसडीओ शिवशंकर चौकसे ने बताया:
“मेरे द्वारा घटिया निर्माण पर कार्रवाई कर 20 लाख की रिकवरी निकाली गई, लेकिन ठेकेदार ने उच्चाधिकारियों से सांठगांठ कर मेरा ट्रांसफर करवा दिया।”
केवलारी-उगली मार्ग बिना अनुमति शुरू हुआ 9 करोड़ का प्रोजेक्ट
इस सड़क के निर्माण में भी अनियमितताओं की भरमार है, सिवनी विधायक का आरोप है कि सदगुरू केपिटल बिना विभागीय स्वीकृति के निर्माण कार्य शुरू किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है। घटिया बेस लेयर, गिट्टी की मात्रा कम, और रोड के किनारे की सुरक्षा में भारी खामियां देखी गईं। कई जगह ड्रेनेज और वाटर लॉगिंग की व्यवस्था ही नहीं है।
विधायक दिनेश राय मुनमुन ने आरोप लगाया:
“केवलारी-उगली मार्ग में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया, न ही तकनीकी स्वीकृति ली गई। फिर भी ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया।”
पैटर्न साफ है: ईमानदारों को हटाओ, भ्रष्टों को चार्ज दो
जहां एक ओर ईमानदार एसडीओ चौकसे को ट्रांसफर कर दिया गया, वहीं उनके स्थान पर भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे सब इंजीनियर चौबे को चार्ज सौंप दिया गया। नए प्रभारी द्वारा पुराने रिकॉर्ड्स में फेरबदल कर ठेकेदार को क्लीन चिट देने की कोशिश की जा रही है।
शिकायतकर्ताओं को ब्लॉक किया गया, फोन नहीं उठाए जा रहे
जब क्षेत्रीय लोगों ने शिकायत दर्ज करानी चाही, तो संबंधित अधिकारियों ने उनके मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए। यह केवल लापरवाही नहीं, साफतौर पर भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास है।
विधायकों की मांग – हो उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई,
विधायक दिनेश राय मुनमुन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर रखी ये मांगें:
दोनों मार्गों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच हो, दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए, लंबित बिलों की भी जांच कराई जाए, जो अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई हो।
ठाकुर रजनीश सिंह (विधायक केवलारी) ने कहा
डोभ – खरसारू और केवलारी – उगली दोनों सड़कों का निर्माण बहुत लंबे समय बाद हो रहा है। लेकिन अब उसमें भी लूट मची है। जनता को धोखा मिल रहा है, और शासन आंख मूंदे बैठा है। भाजपा के शासन में ठेकेदारों के हौंसले बुलंद है ।





