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ग्राहको को दिया जा रहा है जहर, ग्राहक पंचायत ने सौंपा ज्ञापन

 

सिवनी यशो:- ग्राहक पंचायत की प्रांतीय समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम कें अनुसार अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत इकाई जिला सिवनी द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है । जिसमें मुख्य रूप से कहा गया है कि जिला मुख्यालय सहित जिले के अनेक क्षेत्रों में दूध एवं दूध से निर्मित उत्पाद मिलावटी प्राप्त होने के साथ अन्य सामग्री उपभोक्ताओं को मिलावटी प्राप्त हो रही है । जिसकी सघन जाँच कर उपभोक्ताओं को शुद्धता युक्त सामग्री प्रदाय करना सुनिश्चित किया जाये ।

ग्राहक पंचायत की जिला इकाई द्वारा सौंपे गये में कहा गया है कि उनका उद्देश्य ग्राहको को शुद्ध दूध एवं उससे बने उत्पादो की प्राप्ति सुनिश्चित कराना है। ज्ञापन में एफएसएसएआई (FSSAI) के अनुसार देश भर में लगभग 70 प्रतिशत दूध के नमूनों को मिलावटी पाया गया है, कुछ राज्यों में तो 100 प्रतिशत तक दूध के नमूने एफएसएसएआई (FSSAI)  द्वारा निर्धारित दूध मानको क अनुरूप नही है। 14 प्रतिशत नमूनो में डिटर्जेंट पाया गया है।

युरिया, डिटर्जेंट, रिफाइंड तेल, कास्टिक सोडा, बोरिक एसिड से बन रहा है दूध

46 प्रतिशत दूध में पानी – एफएसएसएआई (FSSAI) ने कुल 1791 नमूने का परीक्षण किया, जिनमें 46 प्रतिशत दूध में पानी मिलावट की वजह से काम सॉलिड नॉन फैट की श्रेणी के थे, और लगभग 548 नैनो में स्कीम मिल्क पाउडर की उपस्थिति पाई गई जिनमें से 477 नमूनो में ग्लूकोज मौजूद था। सिंथेटिक और मिलावटी दूध और दूध के उत्पाद यूरिया, डिटर्जेंट, रिफाइंड तेल, कास्टिक सोडा, बोरिक एसिड आदि का उपयोग करके तैयार किए जाते है। जिला सिवनी में दूध का उत्पादन और मांग में भारी अंतर है, जिले की तरफ से इस पर रोक लगाने हेतु पर्याप्त संसाधनो की कमी के कारण मिलावट करने वाले व्यापारियों को खुला बाजार मिलता है। ऐसे व्यापारियों पर कठोर कार्यवाही न होने के कारण यह मिलावट का व्यापार बिना रोक-टोक फैलता है। आम नागरिक के पास दूध की शुद्धता हेतु न तो समय है, ना ही संसाधन। अत: जो भी दूध जनता को मिलता है उसी का उपयोग करते है।

फूड टेंस्टिंग मोबाईल बैन उपलब्ध कराने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला इकाई सिवनी ने मांग की है कि जिला सिवनी में फूड टेस्टिंग मोबाईल वैन होनी चाहिए, दूध एवं खादय पदार्थों में मिलावट रोकने हेतु फ्लाइंग स्क्वायड का गठन होना चाहिए, जिल में सैंपल की जांच हेतु प्रत्येक तहसील स्तर पर प्रशासन की ओर से एक नि:शुल्क ओपन टेस्टिंग सेंटर (खुला जांच केन्द्र) होना चाहिए, जिले में पर्याप्त फूड इंस्पेक्टर नियुक्त किये जावे, जिसमें त्वरिक कार्यवाही की जा सकें, प्रशासन की ओर से जांच करने पर जब दूध में मिलावट की मात्रा पाई जाती है, जैसे पेट खराब होना, उल्टी दस्त, एलर्जी का होना, किडनी, लीवर, हार्ट का नुकसान होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

मिलावटखोरो पर आपराधिक मामले दर्ज हो

अत: अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला इकाई सिवनी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इसी प्रकार सिंथेटिक और मिलावटी दूध के उत्पादन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की मांग करता है। साथ ही दूध में मिलावट की रोकथाम न किये जाने तथा कार्य में लापरवाही करने पर उस क्षेत्र के अधिकारी के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही हो।

इस ज्ञापन में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला ईकाई सिवनी के जिला अध्यक्ष राघवेन्द्र शर्मा, जिला उपाध्यक्ष तिरूमलेश शर्मा, जिला सचिव दीपक तिवारी, प्रदीप बांगड, मनीष मारू, दीपक अग्रवाल, राम साहू, चेतन दीक्षित एवं सम्मनीय ईकाई के सदस्य तथा अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांतीय संगठन मंत्री गौरव सिंह भदौरिया शामिल हुये।

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