चुनाव तो ईव्हीएम से ही होंगे – सुप्रीम कोर्ट, सारी याचिकाएँ खारिज
सिवनी यशो:- सुप्रीम कोर्ट ने बैलट पेपर से चुनाव कराने और इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT स्लिप की 100 प्रतिशत क्रॉस-चेकिंग कराने से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने एकमत से फैसला सुनाया। लेकिन एक बड़ा फैसला भी दिया। कोर्ट ने (EVM) के इस्तेमाल के 42 साल के इतिहास में पहली बार जांच का रास्ता खोल दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि किसी सिस्टम पर आंख मूंदकर संदेह करना सही नहीं है। इसलिए हमारे अनुसार सार्थक आलोचना की आवश्यकता है, चाहे वह न्यायपालिका हो, विधायिका हो। लोकतंत्र का अर्थ सभी स्तंभों के बीच सद्भाव और विश्वास बनाए रखना है। विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देकर हम अपने लोकतंत्र की आवाज को मजबूत कर सकते हैं।
एसोसिएशन फार डेमेक्रेटिक रिफार्मस (एडीआर) संस्था और कुछ अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम से 100 प्रतिशत मिलान की मांग की थी । इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुये सुप्रिम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल करके डाले गए वोटों के पूर्ण क्रास-सत्यापन की मांग करने वाली याचिकाओं को आज सु्प्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने इसी के साथ कहा कि उम्मीदवार नतीजों के 7 दिनों के भीतर ईवीएम के माइक्रोकंट्रोलर के सत्यापन के लिए शुल्क का भुगतान करके दौबारा काउंटिंग की मांग कर सकता है। किसी प्रकार की गड़बडी प्राप्त होने पर किया भुगतान वापिस कर दिया जायेगा । इसी के साथ कोर्ट ने बैलेट पेपर से चुनाव की मांग भी खारिज की ।
कोर्ट के इस फैसले पर वैलेट से मतदान कराने वाले राजनैतिक दलों को अभी भी चैन नहीं मिलेगा । अपनी हार का ठीकरा हमेशा ईव्हींएम पर फोडऩे का सिलसिला चलते रहेगा । सुप्रिम कोर्ट के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विरोधियों को करारा तमाचा बताया है तो । कांग्रेस के प्रवक्ता रहे आचार्य प्रमोद ने सोशल मीडिया के एक्स अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुये लिखा है कि बीमारी राहुल गांधी के दिमाग में है मशीन में नहीं ।



