15 साल से सड़क की मांग अधूरी, बच्ची की जान गई, बच्चे कीचड़ में स्कूल जाने को मजबूर
ग्रामीण बोले – नेताओं और विभागों ने सिर्फ आश्वासन दिए, सड़क नहीं
Seoni 31August 2025
सिवनी यशो:- जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत कोहका मानेगांव के नये पटपुरा मोहल्ला के लोग पिछले 15 सालों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
हालात यह हैं कि बच्चे कीचड़ में गिरते-पड़ते स्कूल जाने को मजबूर हैं, वहीं बीमार मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
हाल ही में समय पर उपचार न मिल पाने से एक बच्ची की मौत हो गई, जिसने प्रशासन की नींद और संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगभग दो दर्जन परिवार इस मोहल्ले में रहते हैं –
जिनमें करीब 50 स्कूली बच्चे और 20 दूध व्यवसायी परिवार रोज़ाना सिवनी तक आते-जाते हैं।
मगर कोहका प्राथमिक शाला से पटपुरा मोहल्ला तक का रास्ता बरसात में दलदल में बदल जाता है।
कीचड़ और गंदे पानी से अब यहां बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास और विभागीय टालमटोल
ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव तक ज्ञापन सौंप चुके हैं।
स्थानीय विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ ने 2020 से लगातार पत्राचार कर इस सड़क को स्वीकृति दिलाने की कोशिश की है।
2022 में इसे ग्रेवल सड़क की सूची में शामिल किया भी गया, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हो पाया।
ग्रामीण जब ग्राम पंचायत जाते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि टेंडर हो चुका है और लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़क बनाएगा।
लेकिन विभाग फंड न होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है।
नतीजा यह कि 15 साल से सिर्फ कागजों में सड़क बनी है, जमीन पर नहीं।
दर्दनाक हादसा और लोगों की पीड़ा
हाल ही में एक बच्ची दूध से जल गई थी। उसका इलाज सिवनी में कराया जा रहा था,
लेकिन एक दिन खराब रास्ते के कारण उसे समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका,
और उसकी मौत हो गई।
इस घटना ने लोगों के आक्रोश को और गहरा कर दिया है।
ग्रामीणों द्वारा भेजे गए फोटो बताते हैं कि –
कैसे स्कूल जाते नन्हें बच्चे कीचड़, और गंदगी में गिरते-पड़ते पहुंचते हैं।
बरसात में मोहल्ले का माहौल इतना खराब हो जाता है कि –
सड़ा पानी दुर्गंध देने लगता है और बीमारियां फैलने लगती हैं।
निष्कर्ष
पटपुरा मोहल्ले के लोगों की पीड़ा इस बात का प्रतीक है कि विकास के दावे करने वाली सरकार,
और विभागीय लापरवाही के बीच आम नागरिक 15 साल से मूलभूत सुविधा – सड़क के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यदि सड़क नहीं बनी तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।



