सिवनी

करोड़ों खर्च के बावजूद बरकरार जलभराव की समस्या

छपारा नगर में  निर्माण कार्यों की जांच की उठी मांग

Seoni 28 June 2025
छपारा यशो:- छपारा नगर में प्रदेश शासन द्वारा नगर विकास के लिए आवंटित करोड़ों रुपये खर्च हो जाने के बावजूद जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है। नगर परिषद की कार्यकारिणी गठन के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी ठोस और व्यवस्थित विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।

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छपारा नगर में बारिश के बाद जलभराव से जूझते लोग
छपारा में पहली बारिश में जलभराव से प्रभावित सड़कें और नागरिक

नाली निर्माण में करोड़ों खर्च, फिर भी जलनिकासी विफल

नगरवासियों का कहना है कि नाली निर्माण में भारी राशि खर्च की गई, लेकिन अधिकांश नालियाँ तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। पहली ही बारिश में कई मोहल्लों में घरों तक गंदा पानी घुस गया, जिससे नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ा।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद के इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से नालियाँ जैसे-तैसे बनाई जा रही हैं। कहीं चौड़ी, कहीं संकरी – बिना समन्वय के बनाई जा रहीं नालियाँ न केवल जलनिकासी में असफल हैं, बल्कि शहरी सौंदर्य और नागरिक सुविधा को भी नुकसान पहुँचा रही हैं।

अतिक्रमण हटाने में नाकामी से बिगड़ी योजना

सड़क और नाली निर्माण के दौरान अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस पहल न किए जाने के कारण निर्माण कार्य जहाँ जितनी जगह मिली, वहीं कर दिया गया। नतीजतन, नालियाँ और सड़कें समरूप नहीं बन पाईं, जिससे जल बहाव की स्वाभाविक दिशा अवरुद्ध हो गई।

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पुरानी नालियों की अनदेखी बनी बड़ी चूक

नवीन निर्माण के साथ पूर्व निर्मित या अधूरी नालियों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। नागरिकों का मानना है कि यदि नगर परिषद थोड़ा समय निकालकर मौजूदा नाली तंत्र का समुचित रखरखाव करती, तो जलभराव की समस्या से कुछ हद तक निजात मिल सकती थी।

“प्यास लगने पर कुआँ खोदने” जैसी स्थिति

स्थानीय लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली “प्यास लगने पर कुआँ खोदने” जैसी हो गई है। वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले जलभराव की वर्षों पुरानी समस्या पर ध्यान न देना परिषद की विफलता को उजागर करता है।

कर वसूली बनाम सुविधा: सवालों के घेरे में परिषद

छपारा के नागरिक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि टैक्स तो सभी प्रकार से वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में सुविधाएँ क्यों नहीं मिल पा रहीं? तीन वर्षों में कोई स्थायी समाधान न निकाल पाने को लेकर नगर परिषद की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।

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