"दिया तले अंधेरा: कलेक्ट्रेट में गंदगी का अड्डा, स्वच्छता अभियान बना मजाक"
"कलेक्ट्रेट के शौचालय से उठती बदबू, प्रशासन के दावो को कर रहे बेनकाब"
Seoni 12 August 2025
सिवनी यशो:- सरकार का स्वच्छता अभियान जनता को साफ-सुथरा माहौल देने का सपना दिखाता है। मंच पर भाषण, गाँव-गाँव रैलियाँ और पोस्टरों में चमक-दमक लेकिन हकीकत “दिया तले अंधेरा” वाली है।
सिवनी नगर पालिका परिषद, जो इस साल स्वच्छता रैंकिंग में बुरी तरह पिछड़ गई, के लिए यह शर्मनाक है कि जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर में ही गंदगी का साम्राज्य फैला है।

हमारे संवाददाता ने जो दृश्य कैमरे में कैद किए, वे सीधे-सीधे जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलते हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर का सार्वजनिक शौचालय गंदगी, कीचड़ और बदबू से भर चुका है।
महिला-पुरुष दोनों के लिए बनाए गए इस शौचालय में प्रवेश करना तो दूर, उसके आस-पास खड़ा होना भी मुश्किल है। दमघोंटू बदबू से अनुविभागीय कार्यालय तक का माहौल दूषित हो चुका है।

हालांकि इसी शौचालय के समीप संयुक्त कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदारों के कार्यालय सहित अन्य अधिकारियों के कार्यालय भी स्थिती है ।
गंदगी से बजबजा रहे शौचालय के बिल्कुल सामने संयुक्त कलेक्टर का वाहन चार्ज हो रहा है जिसके संबंध में हम कुछ नहीं कहेंगे परंतु स्वच्छता पर सवाल तो उठाया जायेगा ।
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जनप्रतिनिधि और अधिकारी मंच से स्वच्छता के गुण गाते हैं, लेकिन जब जिला मुख्यालय की यह दुर्दशा है, तो बाकी शहर और गाँव की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
सवाल जो उठने लाजिमी हैं:
स्वच्छता पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी हालात ऐसे क्यों?
रैंकिंग गिरने पर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते?
क्या प्रशासन के लिए स्वच्छता केवल फोटोशूट और दिखावा बनकर रह गई है?
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सच यही है — स्वच्छता अभियान अब स्लोगन और पोस्टर तक सिमट चुका है। जिला प्रशासन की लापरवाही और कमजोर निगरानी ने इस योजना को मजाक बना दिया है।कलेक्ट्रेट परिसर का यह बदबूदार सच जनता के भरोसे पर सीधा हमला है।



