धूमा यशो:- वर्तमान में रबी फसल की बुवाई जोरों पर चल रही है धूमा क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की अत्यंत कमी है खरीफ में अतिवृष्टि से किसानों को भारी क्षति हुई है और अब सिंचाई के लिए पानी की कमी से कृषक चिंतित हैं शीघ्र बुवाई और सिंचाई करके किसान अपनी फसल को जल्द उगाना चाहते हैं ऐसे में बिजली विभाग की अमानवीयता और तानाशाही किसानों को हैरान कर रही है विद्युत विभाग द्वारा दो शेड्यूल में विद्युत प्रदाय किया जा रहा है पहले शेड्यूल में एक फीडर में सुबह 5:00 बजे से सुबह 11:00 तक और रात्रि में 9:00 बजे से 1:00 बजे तक जबकि दूसरे शेड्यूल में दूसरे फीडर में सुबह 11:00 से शाम 5:00 बजे तक और रात्रि में 3:00 बजे से प्रात: 7:00 बजे तक विद्युत प्रदाय किया जा रहा है दिन के समय किए जा रहे विद्युत प्रदाय में बार-बार परमिट लेकर मेंटेनेंस का कार्य किया जाता है छ्वश्वऔर ष्ठश्व से बात करने पर भरपाई करने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन डेढ़ से दो घंटे विद्युत प्रदाय के समय प्रदाय अवरुद्ध करके मेंटेनेंस किया जाता है और भरपाई के समय 10 से 15 मिनट विद्युत देकर खानापूर्ति कर दी जाती है
सुबह 4:00 बजे किसान अपनी पाइपलाइन की शिफ्ट कैसे बदलेगा ? रात्रि में 3:00 बजे किसान अपनी लाइन को कैसे चेक करेगा ? यदि रात्रि में विद्युत लाइन का मेंटेनेंस नहीं किया जा सकता तो सिंचाई की लाइन कैसे बदली जा सकती है ?
इसके अलावा मेंटेनेंस का कार्य जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य अत्यधिक विलंब से किया जा रहा है विभाग द्वारा स्टाफ के अभाव और साधन वाहन के अभाव का रोना रोया जाता है ऐसी स्थिति में स्वयं किसान ट्रांसफार्मर खोल रहे हैं और निजी वाहन से लखनादौन रिपेयर कराने ले जा रहे हैं लखनादौन में ्रश्व ऑफिस में कहा जाता है कि ट्रांसफॉर्मर रिपेयरिंग के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है जली हुई क्वायल बदलने के लिए क्वायल नहीं है ट्रांसफार्मर में डालने के लिए आइल नहीं है ऐसी स्थिति में किसान अपनी सिंचाई कैसे कर पाएगा ! बिजली संबंधी समस्या के निराकरण के लिए छ्वश्व और ्रश्व महोदय फोन नहीं उठाते फोन करने पर ट्यूनिंग में कहा जाता है कि बिजली संबंधी समस्या के निराकरण के लिए किसानों को कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है 1912 में फोन करें जबकि 1912 में शिकायत दर्ज करने पर अधिकारी किसानों को धौंस देते हैं कि आपने शिकायत क्यों की अब आप 1912 से ही अपनी समस्या का निराकरण करायें
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जा रही हैं केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय डबल करने के लिए अथक प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन बिजली विभाग केंद्र और प्रदेश सरकार की मनसा पर ग्रहण लगा रहे हैं
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर खाद बीज की ब्लैकमेलिंग की जा रही है स्थानीय संस्थाओं और व्यापारियों द्वारा खाद ब्लैक किया जा रहा है जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है प्रशासन से आग्रह है कि किसानों की समस्या पर का तुरंत निराकरण किया जाए अन्यथा किसान उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी !




