मातृशक्ति की प्रेरणा देवी अहिल्या बाई ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुये प्रजाहित में लीन रही – सुलभा ताई
पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी वर्ष पर राष्ट्रसेविका समिति का कार्यक्रम संपन्न
सिवनी 17 दिसंबर 2024
सिवनी यशो:- राष्ट्र सेविका समिति सिवनी जिला द्वारा सोमवार को राशि लॉन में पुण्य श्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर के जन्म के त्रिशताब्दी वर्ष पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुलभाताई देशपांडे जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए बताया।
राष्ट्र सेविका समिति ने प्रारम्भ से ही देवी अहिल्या बाई को कर्तृत्व का आदर्श माना है। इतिहास में अहिल्याबाई का उल्लेख केवल ‘अहिल्याबाई’ ऐसा नहीं मिलता। पुण्यश्लोक, देवी, साध्वी, मातोश्री, गंगाजल सम निर्मल ऐसी भिन्न-भिन्न उपाधियों से उन्हें विभूषित किया जाता है। प्रत्येक विशेषण उनके जीवन की पवित्रता, शुद्धता, सात्विकता का बोध कराती हैं । उनका जीवन एक प्रचंड कार्यशाला थी। बडा अद्भुत चरित्र ! व्यक्तिगत जीवन आपत्तियों से, कठिनाईयों से, दु:ख-दर्द से भरा हुआ, परंतु उसके चिन्ह कभी भी सामाजिक जीवन पर नहीं पड़ें।
अपना दुख-दर्द हृदय में दबाते हुए स्थिर चित्त से वह प्रजाहित के कार्य में लीन रही। अपने ध्वस्त जीवन के टुकडों को संजोते नही बैठी तो शत्रुओं द्वारा खंड-विखंड किये गयें देशभर के अनेक मंदिर उन्होंने शान से, गौरव से बनवाये। टूटे-फूटे घाट पुन: बंधवाएं। आश्रितों में, गोर-गरिबों में अपने अल्पायुषी प्रिय पुत्र मालेरावजी की प्रतिमा देखी, इसी कारण से वह अजर-अमर बनी। कालगर्भ में समाये हुए आज उन्हें 200 से अधिक वर्ष हुएं हैं, परंतु उनकी कर्तृत्वगाथा नर्मदा के पत्थर-कंकड, गंगा के घाट, रामेश्वर का सागर तट, बद्रीनाथ की पहाडियाँ, स्थान-स्थान पर बने हुएं मंदिर, धर्मशालाएं गातें रहे हैं और गाते रहेंगे।
आज भी हम उन्हें यहाँ स्मरण करने के लिए उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को देवी अहिल्या के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके गुणों को अपने जीवन में आत्मसात कर देश एवं समाज में अपना योगदान देना चाहिए एवं इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के नाते सुमन शुक्ला सुभाष विद्यालय कि शिक्षिका उपस्थित रही। साथ ही राष्ट्र सेविका समिति महाकौशल प्रान्त कि प्रांत प्रचारिका एवं अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख सुश्री वसुधा सुमन उपस्थित रहीं। कार्यक्रम मे कुल 125 बंधु/भगिनियों कि उपस्थिति रही।



