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good morning thoughts : प्रसन्नता हमारे नैतिक आचरण के लिए भी आवश्यक है

  प्रसन्नता ऐसा टॉनिक है, जिसका नित्य-पान करके व्यक्ति तन्दुरुस्त हो जाता है। खुशी ऐसी औषधि है, जिसका सेवन करने से मनुष्य के घाव ठीक हो जाते हैं।

इससे व्यक्ति के मन पर जमी विषाद की धूल झड़ जाती है। इससे आरोग्य लाभ होता है। मनुष्य का जीवन रोते-बिलखते हुए जीने के लिए नहीं है, बल्कि गाते-मुस्कुराते, हँसते-खेलते बिताने के लिए है।

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मान लीजिए हमारे ऊपर गम्भीर उत्तरदायित्व है, तो इसका मतलब यह तो नहीं, कि हम रोनी सी सूरत बनाए घूमें। इससे तो दुःख और दुगुना हो जाता है। मुस्कान- सुख की खान।

प्रसन्नता की वृत्ति हमारे नैतिक आचरण के लिए भी लाभकारी है। कड़ी से कड़ी बात को हँसकर टाल देने से अनर्थों से बचाव हो जाता है, कड़वापन मिठास में बदल जाता है।

बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को जोर से हँसने से मना करते हैं। इससे उनके शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास में बाधा पड़ती है। इससे उनके जीवन का आनन्द-रस सूख जाता है और वे स्वाभाविक विकास से वंचित रह जाते हैं।

घर में आनन्द एवं प्रसन्नता का वातावरण बनना चाहिए। बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यही वह समय है, जब उनमें प्रसन्न रहने की आदत डाली जा सकती है।

नये पौधे को जिस प्रकार खाद एवं पानी की आवश्यकता होती है, उसी तरह बच्चे के लिए पौष्टिक आहार के साथ प्रसन्नता भी आवश्यक है। अगर नींव ही त्रुटिपूर्ण रह जायेगी, तो जीवन उन्नतिशील कैसे बन सकता है?

Dainikyashonnati

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