मध्य प्रदेश का हरा सोना : आदिवासियों की आजीविका का सहारा
Seoni 11 May 2025
सिवनी यशो:-मध्य प्रदेश के वनों में उपजने वाला तेंदूपत्ता वर्षों से “हरा सोना” कहलाता आ रहा है। यह केवल एक वन उत्पाद नहीं, बल्कि राज्य के लाखों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आर्थिक रीढ़ है। विशेष रूप से उत्तर वन मंडल सिवनी के लखनादौन उपमंडल में यह पत्ता आदिवासी आजीविका का प्रमुख स्रोत बन चुका है।
लखनादौन क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ हर साल हजारों परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटते हैं। राज्य सरकार के वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2023 में केवल सिवनी जिले में लगभग 12 लाख मानक बंडल तेंदूपत्ता संग्रहित किए गए, जिससे ग्रामीण संग्रहकों को लगभग 24 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष भुगतान हुआ।
सरकारी योजनाओं और वन समितियों के माध्यम से संग्रहकों को प्रति मानक बोरा 4000 रुपये से अधिक की दर मिलने लगी है, जो पहले की तुलना में दोगुनी है। यह बढ़ा हुआ पारिश्रमिक ग्रामीणों को आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र की 75 से अधिक प्राथमिक वन समितियाँ सक्रिय रूप से तेंदूपत्ता संग्रहण, छंटाई और विपणन में भागीदारी कर रही हैं। साथ ही, प्रदेश सरकार द्वारा बोनस वितरण और बीमा योजनाओं के माध्यम से भी संग्रहकों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
स्थानीय निवासी और संग्रहक मीना बाई बताती हैं, “हमारा पूरा परिवार साल में दो-तीन महीने तेंदूपत्ता तोडऩे जाता है। अब हमें समय पर भुगतान भी मिल रहा है और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ पा रहे हैं।”
तेंदूपत्ता के इस हरित अभियान ने न केवल जंगलों से जुड़ी आजीविका को सशक्त किया है, बल्कि वन संरक्षण में भी जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया है। शासन की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में तेंदूपत्ता संग्रहण को और अधिक संगठित और लाभकारी बनाया जाए।





