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हरियाली महोत्सव के रूप में श्रद्धा एवं उत्साह से मनाई गई गुरु पूर्णिमा, सेवा-साधना और वृक्षारोपण का दिया संदेश

गुरु पूजा, सुदर्शन क्रिया, नारायण सेवा, इंट्यूशन डेमो और संगीतमय सत्संग बने मुख्य आकर्षण

Balaghat 29 July 2026
बालाघाट यशो:-  आर्ट ऑफ लिविंग परिवार, बालाघाट द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव इस वर्ष “हरियाली महोत्सव” के रूप में सेवा, साधना, सत्संग और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक मनाया गया। दिनभर चले विविध आध्यात्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में साधकों, स्वयंसेवकों, बच्चों, अभिभावकों और नगरवासियों ने सहभागिता कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6 बजे हरिमंगलम लॉन में गुरु पूजा के साथ हुआ। साधकों ने गुरु परंपरा का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक वंदन किया। इसके पश्चात विश्वविख्यात सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम, योगासन एवं ध्यान का सामूहिक अभ्यास किया, जिससे उपस्थित लोगों ने मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक आनंद का अनुभव किया।

वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

साधना के बाद सभी स्वयंसेवक वार्ड क्रमांक-1 स्थित एचपी साइड पहुंचे, जहां हरियाली महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण किया गया। सभी ने पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गुरु पूर्णिमा को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की इस पहल की सभी ने सराहना की।

नारायण सेवा के माध्यम से मरीजों को कराया भोजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सेवा कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आर्ट ऑफ लिविंग परिवार ने भगत सिंह जिला चिकित्सालय, बालाघाट में जरूरतमंद मरीजों एवं उनके परिजनों को भोजन वितरित किया। संस्था ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी प्रत्येक उत्सव को सेवा से जोड़ते हुए जरूरतमंदों तक भोजन एवं सहयोग पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रखा जाएगा।

गुरु पूर्णिमा जीवन को पूर्णता की ओर ले जाने का पर्व : आशीष पटेल

शाम को हरिमंगलम लॉन में आयोजित भव्य संगीतमय सत्संग एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक आशीष पटेल ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।

उन्होंने कहा कि “गुरु बिन गति नहीं”, क्योंकि गुरु ही जीवन को सही दिशा और गति प्रदान करते हैं। उन्होंने ‘गुरु’ शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि ‘गु’ का अर्थ गुण और ‘रू’ का अर्थ रूप है। जो ज्ञान, प्रेम और करुणा से जीवन को प्रकाशित कर सही दिशा देता है, वही सच्चा गुरु है।

बच्चों ने इंट्यूशन प्रोसेस का किया प्रेरक प्रदर्शन

गुरु पूर्णिमा महोत्सव का विशेष आकर्षण इंट्यूशन प्रोसेस कोर्स पूर्ण कर चुके बच्चों का प्रदर्शन रहा। बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर वस्तुओं, चित्रों एवं रंगों की पहचान, चित्रकारी सहित विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया।

वहीं इंट्यूशन प्रोसेस-2 पूर्ण कर चुके बच्चों ने मानसिक एकाग्रता के माध्यम से स्पून बेंडिंग का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।

इस अवसर पर बताया गया कि नियमित सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम, योग एवं ध्यान के अभ्यास से मन शांत होता है, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है तथा व्यक्ति की अंतःप्रज्ञा विकसित होती है।

भक्ति, सेवा और संकल्प के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के दौरान भजन गायकों ने गुरु वंदना एवं सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अंत में सभी ने गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सेवा, साधना और सत्संग के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लिया तथा “जय गुरुदेव” के उद्घोष के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का समापन हुआ।

इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशिक्षक पी.के. सिंह, विकास सोनेकर, सुशीला बोरिकर, रीतु मोहारे, सुरजीत सिंह ठाकुर, हेमंत रहांगडाले, मानक नागेश्वर, संरक्षक रमेश रंगलानी, प्रो. गोविन्द सिरसाठे, प्रो. योगेश विजयवार, भारती सुरजीत ठाकुर, ज्ञान नैनवानी, जितेंद्र मोहारे, राजेश लिल्हारे, जैनेंद्र कटवे, नलिन बिसेन, विजय बिसेन, हरीश मर्सकोले, विक्की पालेवार, विकास बिसेन, जीवेश वैष, जय अजीत, आयुष घोडेश्वर, राम मातरे, पंकज सिंघन दुबे, बब्लू वैस, हेमांशु सिंह, पुलकित रहांगडाले, आकाश चौहान, जितेंद्र राजपूत, देवेंद्र बिसेन, दिनेश त्रिवेदी, आदित्य रहांगडाले, घनश्याम सिंह, प्रवीण पारदी, पियूष रहांगडाले एवं सहदेव लिल्हारे सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, साधक, बच्चे, अभिभावक एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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