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सिवनी में आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरण चिन्ह प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियाँ, मुनि संघ ने दी स्वास्थ्य और गौ-संरक्षण की प्रेरणा

जैन बड़ा मंदिर सिवनी में मुनि संघ के सान्निध्य में मांगलिक क्रियाएँ सम्पन्न, 21 अगस्त को होगा प्रथम चरण चिन्ह अभिषेक एवं 108 द्रव्य से पूजन

Seoni 20 August 2025

सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर सिवनी (म.प्र.) में 20 अगस्त 2025 को प्रातःकालीन बेला में मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं।

इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित मुनि संघ — परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री भावसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए।

कमेटी ने बताया कि 21 अगस्त को प्रातः 6 बजे सिवनी के इतिहास में पहली बार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्ह की प्रतिष्ठा होगी।

इस दौरान विश्व में पहली बार 108 द्रव्यों से 108 पूजन और विशेष अभिषेक का आयोजन किया जाएगा।

 धर्मसभा का संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा—

  • भारत का उत्थान शाकाहार और स्वस्थ जीवन शैली से ही संभव है।

  • “विश्व एक परिवार है” की भावना अपनाकर किसी को कष्ट न पहुँचाएँ।

  • गाय राष्ट्र की रीढ़ है, यह चेतन धन और सर्वश्रेष्ठ संपदा है।

  • गौशालाओं को सहयोग दें, विवाह/जन्मदिन/पुण्यतिथि जैसे अवसरों पर गौशाला अवश्य जाएँ।

  • शरीर राष्ट्रीय संपत्ति है, इसका सही उपयोग करें।

  • वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्ति और स्वदेशी अपनाना राष्ट्रीय कर्तव्य है।

  • भारत आने वाले समय में पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।

 स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर विचार

अंतरराष्ट्रीय अंक विज्ञान चिकित्सक श्रीमती प्रमिला जैन ने कहा कि:

  • जीवनशैली में परिवर्तन से बीमारियाँ बढ़ रही हैं, जिन्हें प्राणायाम और ध्यान से दूर किया जा सकता है।

  • भारतीय चिकित्सा पद्धति आज भी विश्व में सर्वोत्तम है।

  • आचार्य श्री विद्यासागर जी की प्रेरणा से जबलपुर में “पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय” स्थापित हो रहा है।

  • भारत में आज भी घरेलू नुस्खे कारगर सिद्ध हो रहे हैं।

  • इतिहास में सर्वप्रथम इंजेक्शन और ऑपरेशन ब्लेड का आविष्कार भारत में हुआ था।

 मुख्य संदेश

  • गाय की रक्षा राष्ट्र की रक्षा है।

  • शाकाहार अपनाएँ, निरोगी रहें।

  • हर पर्व और अवसर पर वृक्षारोपण करें।

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाएँ।

  • भारत का गौरव बढ़ाएँ और विश्वगुरु बनाने में सहयोग करें

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