प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भ्रष्टाचार, जालसाजी,सरकार की मंशा पर प्रहार
जमुनिया ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना में घोटाला उजागर
अपात्रों को आवास, पद पर बैठे परिजनों को लाभ — कार्रवाई शून्य
Seoni 20 July 2025
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में गरीब कल्याण योजनाओं की आड़ में चल रहा भ्रष्टाचार सरकार की मंशा पर सीधा प्रहार कर रहा है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में योजनाओं के नाम पर खुलेआम गड़बड़ी सामने आ रही है, लेकिन जनपद और जिला पंचायत प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
जमुनिया पंचायत में पीएम आवास योजना में हेराफेरी
सिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुनिया में रोजगार सहायक सुशील कुमार डहेरिया द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गड़बड़ी के प्रमाण सामने आए हैं। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत ने अपात्र लोगोंं को तो लाभ दिया ही है ग्राम पंचायत के रोजगार सहायाक ने स्वयं की मां और पत्नी को लाभ देते हुये योजना में तो फर्जीवाड़ा किया ही है योजना के लिये संलग्र किये दस्तावेजों एवं बैंक खातों एवं जीओ टेग में भी जालसाजी की है ।
लाभ के लिये पतियों के बदल दिये नाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार मां श्रीमती मेमबती बाई एवं पत्नि श्रीमती चंपाबाई की पात्रता छिपाने के लिए पति के नाम में जानबूझकर बदलाव किया गया है और दोनों के पतियों के स्थानों पर उनके ससुर के नामों का उल्लेख किया है । प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत जमुनिया ने रोजगार सहायक सुशील कुमार डहेरिया की मां मेमबती बाई के पति रमेश डहेरिया स्थान पर उसके ससुर धरमदास का का नाम उल्लेखित किया है । जबकि सुशील डहेरिया की पत्नि चंपा बाई के पति के स्थान पर भी ससुर का नाम रमेश डहेरिया उल्लेखित किया है ।
योजना की निगरानी के नाम पर भी धोखा
यहाँ बतादें कि इस प्रकार के फर्जीवाड़ा ग्राम पंचायत में बड़ी संख्या में किये गये है और सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है । ग्राम पंचायत के कर्मचारी के परिवार के किसी व्यक्ति को योजनाओं का लाभ नहीं दिये जाने का प्रावधान होने वाबजूद दो दो प्रधानमंत्री के आवास दिये जाना जहाँ व्यवस्था और मानीटरिंग की कलई खोल रहे है वहीं यह भी बता दें कि यह मकान केवल कागजो में बने है और जो फोटों चस्पा की गयी है वह भी फर्जी ही है ।
एफआईआर के बाद भी कार्यवाही नहीं
रोजगार सहायक के विरुद्ध पूर्व में एक अन्य मामले में एफआईआर भी दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता सवाल खड़े कर रही है।
पंचायत सचिव ने जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया, जबकि सरपंच ने इसे “मेरे कार्यकाल का मामला नहीं है” कहकर जिम्मेदारी से किनारा कर लिया।
दोनों ने गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की, पर कार्यवाही न होना चिंता का विषय है।
नियंत्रण से बाहर हो रहा है भ्रष्टाचार
जनपद और जिला पंचायत के अधिकारियों पर भी आरोप लग रहे हैं कि वे भ्रष्ट सरपंचों, सचिवों और रोजगार सहायकों से “जेल भेजने” की धमकी देकर अवैध वसूली कर रहे हैं।
सरकारी धन की खुली लूट हो रही है, और योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच रहा।
प्रश्न उठता है:
जब दस्तावेज़ों और एफआईआर के बावजूद कार्यवाही नहीं होती, तो प्रशासन की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या सरकार की योजनाओं को इस तरह पलीता लगाना ही “स्थानीय शासन” है?



