भीमगढ़ नदी पर अधूरा पुल बना ‘मौत का जाल’ — निर्माण में घोर लापरवाही, हजारों ग्रामीणों की जान खतरे में
साल 2020 में बहा था यही पुल — फिर दोहराई जा रही वही पुरानी लापरवाही
Seoni 16 November 2025
सिवनी यशो :- जिले के भीमगढ़ क्षेत्र में वैनगंगा नदी पर बनाए जा रहे नए पुल के निर्माण की सुस्त गति और गंभीर लापरवाही एक बार फिर हजारों ग्रामीणों के लिए जानलेवा स्थिति पैदा कर रही है। जिस पुल को वर्ष 2020 में तेज बहाव में बह जाने के बाद नए सिरे से बनाने का निर्णय हुआ था, उसी पुल के पुनर्निर्माण में आज वही पुराने सवाल—धीमी कार्यप्रणाली, ठेकेदार की मनमानी, और विभागीय अफसरों की उदासीनता—फिर सिर उठाते दिख रहे हैं।

8 करोड़ की लागत से बन रहे 150 मीटर लंबे पुल का काम महीनों बाद भी अधूरा है। निर्माण स्थल पर न डायवर्सन मार्ग ठीक से बनाया गया है, न सुरक्षा व्यवस्था। नतीजा—स्कूल के बच्चे हों, गांवों के लोग हों या बसें… सभी को तेज बहाव, गहरे पानी और पत्थरों से भरे रास्ते से रोज़ाना गुजरना पड़ रहा है।
बसें पानी में धँसकर निकलतीं — बाइकें हर रोज़ गिरने की कगार पर
संलग्न तस्वीरें बताती हैं कि यह राह किस कदर खतरनाक है।
यात्री बसें आधी पानी में डूबकर संकरे, फिसलन भरे पत्थरों के बीच रास्ता बनाती हैं
पीछे आने वाली बाइकें असंतुलित होकर गिरने की स्थिति में
थोड़ी सी गलती में बड़ा हादसा तय
लोगों का कहना है—“यह रास्ता सचमुच मौत से होकर गुजरने जैसा है।”
डायवर्सन नहीं, बैरिकेडिंग नहीं, चेतावनी बोर्ड तक नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि:
ठेकेदार अपनी मनमर्जी पर निर्माण कर रहा है
एमपी ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (सिवनी इकाई-2) के अफसर महीनों से मौके पर झांकने तक नहीं आते
निर्माण की गति “कछुआ चाल”
सुरक्षा मानकों का पूरी तरह अभाव
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा—“जब हादसा होगा, तब फ़ाइलें खोलकर रोने का नाटक किया जाएगा… अभी कोई गंभीरता नहीं।”
सैकड़ों छात्र खतरे में — अभिभावकों की सांस अटकी रहती है
भीमगढ़, छपारा, गंगई रैयत, केवलारी व आसपास के क्षेत्रों से रोज़ पढ़ने जाने वाले सैकड़ों छात्र इसी लापरवाही भरे रास्ते से गुजरते हैं।
बाइक का फिसलना
बसों का पानी में दिशा खोना
अचानक बढ़ता जलस्तर
अभिभावकों की चिंता जायज़—
“कहीं हमारे बच्चे पानी और पत्थरों के बीच हादसे का शिकार न हो जाएँ।”
हर दिन हजारों यात्रियों की परीक्षा
इस मार्ग से रोजाना गुजरते हैं—
एक दर्जन से अधिक यात्री बसें
मालवाहक वाहन
सैकड़ों दोपहिया वाहन
सड़क की हालत ऐसी कि ड्राइवर कह रहे हैं—
“बस का एक झटका गलत जगह लगा तो सीधे पलटने का डर।”
2020 में पुल बह चुका था — तब भी निर्माण की गुणवत्ता पर उठे थे सवाल
सबसे गंभीर बात यह है कि—
यह पुल 2020 में भीमगढ़ बांध के 10 गेट खुलने के बाद बढ़े 2 लाख क्यूसेक पानी के तेज बहाव में बह गया था।
उस समय भी निर्माण की गुणवत्ता, निरीक्षण और सुरक्षा पर सवाल उठे थे।
आज स्थिति फिर वैसी ही दिख रही है—
समय पर निर्माण नहीं, सुरक्षा मानक नहीं, निगरानी नहीं।
ग्रामीणों की कड़ी चेतावनी — “दुर्घटना के बाद ड्रामा नहीं, अभी कार्रवाई चाहिए”
ग्रामीणों की प्रमुख माँगें:
✔ तुरंत सुरक्षित डायवर्सन मार्ग बनाया जाए
✔ निर्माण गति बढ़ाई जाए
✔ स्थल पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, लाइटें और सुरक्षा कर्मचारी तैनात हों
✔ जिम्मेदार अफसर मौके पर उपस्थित होकर कार्य की निगरानी करें
✔ ठेकेदार की मनमानी पर तत्काल लगाम लगे
ग्रामीणों ने साफ कहा—
“कल को हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी विभाग और ठेकेदार की होगी—ग्रामीणों की नहीं।”
यह सिर्फ निर्माण नहीं—जनसुरक्षा का मामला है
यह पुल जिले की महत्वपूर्ण लाइफलाइन है।
यदि काम इसी तरह सुस्त रहा और सुरक्षा इसी तरह नदारद रही… तो यह जगह किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रही है।
कागजी चिंता और घटनाओं के बाद होने वाला ड्रामा बंद कीजिए।
निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और सुरक्षा—अभी, तत्काल सुनिश्चित की जाए।





