धर्मसिवनी

“भक्त के पतन का कारण बनने वाले हर विकार को भगवान स्वयं नष्ट करते हैं”- पं. रूपेश (श्याम) जी महाराज

श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में इंद्र के अभिमान-भंग की दिव्य कथा का वर्णन

पीपरवानी में आयोजित संगीतमय कथा के पाँचवें दिवस भक्तजनों ने रस-लीला, कंस-वध और रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंगों का किया श्रवण

Seoni 16 November 2025

सिवनी यशो:- पीपरवानी स्थित ठाकुर परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पाँचवें दिवस रविवार को कथा व्यास पूज्य पं. रूपेश (श्याम) जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत एवं अप्रतिम लीलाओं का हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

अहंकार के विनाश का दिव्य संदेश

व्यासजी ने कहा कि जब भक्त के भीतर धन, रूप या किसी भी प्रकार का विकार जन्म लेता है, तो भगवान स्वयं उस विकार का नाश कर देते हैं।
इसी प्रसंग को स्पष्ट करते हुए उन्होंने इंद्र के अभिमान-भंग की कथा का वर्णन किया और बताया कि ईश्वर के समक्ष अहंकार का कोई स्थान नहीं रखता।
भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान तोड़कर समस्त संसार को यह पावन संदेश दिया कि भक्ति का मार्ग विनम्रता से ही प्रशस्त होता है।

श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में पं. रूपेश (श्याम) जी महाराज द्वारा इंद्र अभिमान-भंग और रास-लीला का वर्णन
श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास पं. रूपेश (श्याम) जी महाराज दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए।

रास-लीला का तत्वज्ञान: जीव और ईश्वर की एकता

श्रीमद्भागवत में वर्णित रास-लीला पर प्रकाश डालते हुए व्यासजी ने बताया कि गोपियों के रास-लीला में अधिकारी होने के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण ने रास में प्रवृत्ति की।
उन्होंने कहा कि रास का वास्तविक स्वरूप जीव और ईश्वर की परम एकता है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच किसी प्रकार की दूरी शेष नहीं रहती।

वृंदावन से मथुरा तक: कंस-वध और दिव्य लीलाएँ

कथा में आगे श्रीकृष्ण के वृंदावन से मथुरा गमन, कंस-वध, प्रजा के भय से मुक्ति, गुरु-गृह गमन तथा शिक्षा ग्रहण के प्रसंगों का विस्तृत वर्णन हुआ।
इसके साथ ही रुक्मिणी विवाह की दिव्य कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

झांकियों और भजनों ने बांधा समा

कथा के दौरान प्रस्तुत की गई आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं को अध्यात्म और भक्ति रस में डुबो दिया।

कथा के पश्चात प्रसिद्ध भजन गायक रुद्रकांत ठाकुर ने भक्ति-रस से परिपूर्ण भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी।

धर्मप्रेमियों की बढ़ती उपस्थिति

महोत्सव में प्रतिदिन दूर-दूर से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

रविवार को श्रीरामलीला मंडल,

छिंदवाड़ा के पदाधिकारी,

कलाकार व सदस्य भी कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे।

रात्रि में मनोहारी भजन-संध्या

रात्रिकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत महाकौशल के प्रसिद्ध विद्यार्थी रामायण मंडल,

छिंदवाड़ा द्वारा भजन-संध्या प्रस्तुत की गई,

जिससे पूरा कथा मंडप भक्ति-सुर और अध्यात्मिक वातावरण से गूंज उठा

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