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राईस मिलर्स हेतु शासन की नीति की विसंगती पूर्ण : अग्रवाल

सिवनी यशो:- जिला राइस मिल एसोसिएशन द्वारा धान उपार्जन वर्ष 2023-24 में मिलिगं हेतु शासन द्वारा जारी की गई नीति में विसगंतियों को दूर करनेे की मागं को लेकर 5 बिंदुओं का उल्लखेे करते हुए जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौपा गया है। जिसमें इन विसंगतियों को दूर करने का आग्रह किया गया है।
सौपेंं गये ज्ञापन में जिला राइस मिल एसाेिसएशन के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने कहा है कि जारी की गई नीति के बिंदु क्रमांक 13.13 वर्ष 2022-23 की मिलिंग में प्रदेश के अनके जिलों में मिलर्स को दोषी मानकर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए है । इसलिये इस कंंिडका का हटाया जाना ही न्यायोचित है। कंडिका क्रमाकं 11.8 के अनुसार मिलर्स को मिलिंग के पश्चात दी जाने वाली मिलिगं , प्रोत्हसान एवं अपगे्रडसन राशि के संबंध में मिलर्स द्वारा की गई विद्युत खपत का नियम रखा गया है । इसके अतंर्गत हमारा आग्रह है कि जिन मशीनों में अधिक भार का विद्युत कनेक्शन लिया जाता है उनमें अधिक पोलिशर एवं सिल्की पोलिशर होने की वजह स े विद्युत खपत अधिक आती है, जबकि कम विद्युत भार वाले प्लाटों में पोलिशर एवं अन्य मशीनें कम होने की वजह से बिजली की खपत कम आती है इसलिए विद्युत खपत की गणना छोटे प्लांट में 1 युनिट प्रति क्विटल से किया जाना न्यायोचित है। आग े कहा गया कि मिलर्स को मिलिगं पर दी जाने वाली अपग्रेडशन राशि गत वर्ष के समान अनुबंध के समय ही 50,100,200 रुपये प्रति क्विटंल दिए जाने सबंंधी आदेश मिलिगं नीति में शामिल किया जाना चाहिए।
मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम में जमा किये चांवल का परिवहन एवं हमाली की राशि का भुगतान नान/मार्कफेड द्वारा किया जाना चाहिए क्योंकि मिलर भारतीय खाद्य निगम से अनुबंध नही करता है और मिलर का उनसे सीधा कोई संबंध नही होता है । इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम द्वारा विगत 5 वर्षो से मिलर्स द्वारा जमा किये गए चावल की परिवहन राशि का भुगतान नही किया गया है। पुराने मिलर्स से पंजीयन का नवीनीकरण शुल्क 5000 एवंं नए मिलर्स से पंजीयन शुल्क10000 निर्धारित किया गया है, जो कि न्यायोचित नही है विगत वर्र्षों में ऐसा कोई शुल्क विभाग द्वारा नही लिया जाता था अत: इस कंडिका को समाप्त करने का कष्ट कर।

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