जनजाति समाज के अस्मिता–अस्तित्व–विकास पर हुआ गहन मंथन
महाकौशल विचार मंच प्रज्ञा प्रवाह का संवाद कार्यक्रम, पाँच जिलों से आए 141 प्रतिनिधि
जनजाति समाज के अस्मिता–अस्तित्व–विकास पर हुआ गहन मंथन
महाकौशल विचार मंच प्रज्ञा प्रवाह का संवाद कार्यक्रम, पाँच जिलों से आए 141 प्रतिनिधि
Seoni 08 February 2026
सिवनी यशो:- महाकौशल विचार मंच के बौद्धिक आयाम प्रज्ञा प्रवाह सिवनी विभाग के शोध आयाम द्वारा
शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिवनी में
“जनजाति समाज में विमर्श”
विषय पर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगुरु भोज विश्वविद्यालय मिलिंद दांडेकर,
प्रांत संयोजक राकेश सिंह एवं
प्रांत शोध आयाम प्रमुख नरेंद्र गोटिया द्वारा
भारत माता के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला, डिंडोरी एवं बालाघाट से पधारे
141 प्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में
जनजातीय समाज से जुड़ी समस्याओं, चुनौतियों, नवाचारों एवं
समाधानपरक प्रयासों पर सारगर्भित विमर्श किया।
अस्मिता, अस्तित्व और विकास—तीन आधार स्तंभ
मुख्य वक्ता मिलिंद दांडेकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि
जनजाति समाज के साथ कार्य करते समय
अस्मिता, अस्तित्व एवं समग्र विकास
पर केंद्रित दृष्टि अपनाना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज केवल अध्ययन का विषय नहीं,
बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत स्वरूप है।
किसी भी समाज की संस्कृति, सभ्यता और संस्कार का कोई एकमात्र लिखित दस्तावेज नहीं होता,
बल्कि उसका बड़ा हिस्सा वाचिक परंपराओं और लोक-स्मृतियों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है।
शोधार्थियों को चाहिए कि वे केवल लिखित प्रमाणों पर निर्भर न रहें,
बल्कि समाज के बीच जाकर उसके जीवन को समझें।

उन्होंने कहा कि दो सौ वर्ष पूर्व जनजातीय समाज का कोई विस्तृत लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं था,
फिर भी इसी समाज ने अंग्रेजी शासन का संगठित विरोध कर
मातृभूमि के प्रति गहरी निष्ठा का परिचय दिया।
अंग्रेजों ने सबसे पहले जनजातीय समाज के
परंपरागत और वन अधिकार छीनने का कार्य किया।
समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेवियों, शोधकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका,
सांस्कृतिक संरक्षण एवं आत्मनिर्भरता के लिए
किए जा रहे प्रयासों और उनके सकारात्मक परिणामों पर
अपने अनुभव कथन साझा किए।

भारत और भारतीयता के बौद्धिक विमर्श का मंच
प्रज्ञा प्रवाह को भारत और भारतीयता को केंद्र में रखकर
भारत माता के परम वैभव के लिए
विचार, शोध और संवाद के माध्यम से कार्य करने वाला
एक सशक्त बौद्धिक संगठन बताया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मानकचंद सनोडिया ने किया।
अंत में वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ
संवाद कार्यक्रम राष्ट्रभाव और प्रेरणा के वातावरण में संपन्न हुआ।




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