लखनादौन-रायपुर हाई स्पीड कॉरिडोर से बदलेगी मध्यप्रदेश की तस्वीर
महाकौशल और बुंदेलखंड को मिलेगा रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का सीधा लाभ, उद्योग-पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

लखनादौन रायपुर हाई स्पीड कॉरिडोर – 10 हजार करोड़ से बनेगा लखनादौन-रायपुर हाई स्पीड कॉरिडोर, महाकौशल-बुंदेलखंड को मिलेगा बड़ा लाभ
Seoni 23 May 2026
सिवनी /भोपाल यशो:- मध्यप्रदेश के महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ी अधोसंरचनात्मक सौगात के रूप में लखनादौन से रायपुर तक प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर भविष्य में विकास की नई धुरी बन सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 220 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड कॉरिडोर प्रस्तावित किया गया है, जो मध्यप्रदेश के Lakhnadon से छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur तक बनाया जाएगा।
यह कॉरिडोर केवल सड़क परियोजना नहीं बल्कि मध्यप्रदेश को छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने वाला रणनीतिक आर्थिक गलियारा साबित हो सकता है। विशेष रूप से महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए यह परियोजना औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों में नई ऊर्जा का संचार करेगी।
रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा मध्यप्रदेश
प्रस्तावित लखनादौन-रायपुर हाई स्पीड कॉरिडोर आगे चलकर Visakhapatnam तक पहुंचने वाले रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। यह 464 किलोमीटर लंबा और 6 लेन चौड़ा एक्सप्रेस-वे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ेगा।
जानकारी के अनुसार इस एक्सप्रेस-वे का लगभग 124 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़, 240 किलोमीटर हिस्सा ओडिशा और 100 किलोमीटर हिस्सा आंध्रप्रदेश में निर्मित होगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
इस कनेक्टिविटी के बाद मध्यप्रदेश को पूर्वी समुद्री तट और बंदरगाहों तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे औद्योगिक निवेश और निर्यात गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
100 किलोमीटर तक कम होगी दूरी
वर्तमान में Lakhnadon से Raipur की दूरी लगभग 340 किलोमीटर है। अभी यात्रा मंडला, चिल्फी, कवर्धा और बेमेतरा मार्ग से होती है, जिसमें अधिक समय और लागत लगती है।
प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी 100 किलोमीटर से अधिक कम हो जाएगी, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और माल परिवहन भी अधिक तेज एवं किफायती होगा।
सहजपुरी से जुड़ेगा रायपुर
यह हाई स्पीड कॉरिडोर सिवनी जिले के Sahajpuri क्षेत्र से होकर रायपुर तक जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
National Highway 44 का लगभग 160 किलोमीटर हिस्सा बुंदेलखंड के सागर क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में यह कॉरिडोर बुंदेलखंड और महाकौशल दोनों क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय हाईवे नेटवर्क से मजबूत तरीके से जोड़ देगा।
जबलपुर को जोड़ने की तैयारी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari ने लखनादौन तक आने वाले फोरलेन हाईवे को Jabalpur से जोड़ने की दिशा में भी सहमति दी है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना को मंडला क्षेत्र के पास से जोड़ा जा सकता है।
यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो महाकौशल के जबलपुर, मंडला, सिवनी और बुंदेलखंड के सागर, दमोह, छतरपुर और टीकमगढ़ जैसे जिलों को रायपुर और विशाखापट्टनम तक बेहतर संपर्क मिलेगा।
उद्योग, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़क संपर्क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मध्यप्रदेश के आर्थिक भूगोल को भी बदल सकती है। अभी तक औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्र को बंदरगाह आधारित व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इससे:
- उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक लागत कम होगी।
- कृषि उत्पादों का परिवहन आसान होगा।
- पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
- निवेश आकर्षित होगा।
- रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बरघाट-बालाघाट मार्ग और रेल कनेक्टिविटी भी अहम
पूर्व में इस परियोजना को Balaghat मार्ग से जोड़ने की चर्चा भी रही है। वहीं सिवनी से Barghat–बालाघाट मार्ग के निर्माण कार्य को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि यह सड़क नेटवर्क समय पर विकसित होता है तो रायपुर तक सड़क संपर्क स्वतः और अधिक मजबूत हो जाएगा। इसके साथ ही सिवनी होकर रायपुर तक रेल सेवा प्रारंभ करने के प्रयास भी क्षेत्रीय विकास के लिए अहम माने जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश को मिलेगा समुद्री कनेक्टिविटी का लाभ
विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ाव के बाद मध्यप्रदेश को पूर्वी तट के प्रमुख पोर्ट्स तक तेज पहुंच मिलेगी। इससे आयात-निर्यात आधारित उद्योगों को सीधा लाभ होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो मध्यप्रदेश के लिए यह “इकोनॉमिक गेम चेंजर” साबित हो सकती है।
https://www.mpinfo.org/Home/Frm_Minister_Depart_Info?newsid=



