मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सादगी, कारकेड छोड़ टूरिस्ट बस से पहुंचे कार्यक्रम स्थल
पीएम मोदी की मितव्ययता की अपील का पालन, जनप्रतिनिधियों संग बस यात्रा कर दिया बड़ा संदेश

सीएम मोहन यादव सिंगरौली बस यात्रा – सादगी और जनसेवा का अनोखा उदाहरण
Bhopal 23 May 2026
भोपाल यशो:- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मई को सिंगरौली जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता की अपील का पालन करते हुए सादगी और जनसेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

सिंगरौली पहुंचते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने पारंपरिक कारकेड को त्यागते हुए जनप्रतिनिधियों के साथ टूरिस्ट बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल एनसीएल ग्राउंड तक यात्रा की। मुख्यमंत्री का यह अलग और सहज अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
कारकेड छोड़ बस में पहुंचे मुख्यमंत्री, जनता को दिया बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने इस कदम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि की पहचान केवल प्रोटोकॉल और काफिले से नहीं होती, बल्कि जनता के बीच रहकर सेवा करने और उनसे सीधे जुड़ाव से होती है।
मुख्यमंत्री का यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को भी प्रतिबिंबित करता है, जिसमें जनप्रतिनिधियों को सादगी, अनुशासन और मितव्ययिता के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी जाती है।
जनप्रतिनिधियों ने भी बस यात्रा में निभाई सहभागिता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ बस में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री एवं सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री संपतिया उइके, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राधा सिंह, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक सिंगरौली रामनिवास शाह, विधायक देवसर राजेंद्र मेश्राम, विधायक धौहनी कुंवर सिंह टेकाम, विधायक सिंहावल विश्वामित्र पाठक सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अलावा मध्यप्रदेश गृह एवं अधोसंरचना निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय, जनप्रतिनिधि कांतदेव सिंह एवं सुंदरलाल शाह भी बस यात्रा में शामिल रहे।
मुख्यमंत्री का सहज अंदाज लोगों को आया पसंद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह सरल और सहज व्यवहार नागरिकों को काफी पसंद आया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने मुख्यमंत्री के इस कदम को जनसरोकार और सादगी से जोड़कर देखा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की चर्चा रही। लोगों का कहना था कि इस प्रकार के कदम जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मितव्ययिता और अनुशासन का दिया संदेश
मुख्यमंत्री का यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के मितव्ययितापूर्ण दृष्टिकोण और जनसेवा आधारित राजनीति की भावना को मजबूत करता दिखाई दिया। इससे यह संदेश भी गया कि सार्वजनिक जीवन में सादगी और संसाधनों के संयमित उपयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



