मध्यप्रदेश

स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष मॉडल को नई पहचान देगा मध्यप्रदेश, CM डॉ. मोहन बोले- हर व्यक्ति तक पहुंचे नवाचारों का लाभ

वयोमित्र योजना, पंचकर्म यूनिट, आयुष वेलनेस सेंटर और कैशलेस उपचार जैसी योजनाओं को मिलेगा विस्तार

मध्यप्रदेश आयुष स्वास्थ्य योजना – CM मोहन यादव बोले- हर व्यक्ति तक पहुंचे आयुष नवाचार, प्रदेश में बनेंगे नए वेलनेस सेंटर और पंचकर्म यूनिट

भोपाल यशो :- Mohan Yadav ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल उपचार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि आयुर्वेद, योग और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से लोगों के जीवन को स्वस्थ, संतुलित और रोगमुक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में आयुष विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों और योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 22 मई को मंत्रालय में आयोजित आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में विभागीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में चल रही आयुष योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित हो सकें।

धार्मिक पर्यटन स्थलों पर विकसित होंगे आयुष वेलनेस सेंटर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे स्वास्थ्य और पर्यटन दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।

बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और आयुष विभाग के बीच हुए एमओयू के अंतर्गत प्रदेश के 12 प्रमुख स्थलों पर आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इनमें Khajuraho, Omkareshwar, Chanderi, Chitrakoot, Pachmarhi, Orchha, Ujjain, Datia, Mandsaur, Alirajpur, Singrauli और Agar Malwa शामिल हैं।

वयोमित्र” योजना से बुजुर्गों को घर-घर आयुष सेवा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से “वयोमित्र कार्यक्रम” की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह योजना वृद्धजनों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हो रही है। इस योजना के अंतर्गत बुजुर्ग नागरिकों को डोर-टू-डोर आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएं और परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ नागरिकों की सेवा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है तथा वयोमित्र कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

असाध्य रोगियों के लिए “कारूण्य” योजना बनी सहारा

बैठक में “कारूण्य योजना” की भी जानकारी दी गई, जिसके अंतर्गत असाध्य और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से राहत और गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास मानवता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

जिला अस्पतालों में बनेंगे आयुष विंग और पंचकर्म यूनिट

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुरूप जिला स्तरीय अस्पतालों में एलोपैथी के साथ आयुष चिकित्सा की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए अलग आयुष विंग स्थापित किए जा रहे हैं।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 22 जिलों के एलोपैथिक अस्पतालों में आयुष विंग की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट भी स्थापित की जाएगी, जिससे मरीजों को आयुर्वेदिक उपचार और थेरेपी का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन कार्यों की गति तेज की जाए और आयुष सेवाओं को जनसुलभ बनाया जाए।

पांच नए आयुर्वेद कॉलेज और 12 आयुष अस्पतालों की तैयारी

प्रदेश में आयुष शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 12 जिलों में 50 बिस्तरों वाले आयुष अस्पताल प्रारंभ करने की कार्यवाही चल रही है।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत Narmadapuram, Morena, Shahdol, Balaghat, Sagar, Jhabua और Shujalpur में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के निर्माण को मंजूरी मिली है।

भोपाल आयुर्वेद महाविद्यालय में 29 करोड़ की लागत से निर्माण

Pandit Khushilal Sharma Government Autonomous Ayurveda College परिसर में 29 करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक एवं अकादमिक भवन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में छह जिला आयुष कार्यालय तैयार हो चुके हैं तथा 80 आयुष औषधालयों में से 53 भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

आयुष उपचार को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ने का लाभ

राज्य सरकार श्रम विभाग के साथ समन्वय कर कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) से जुड़े लगभग 13 लाख श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा की कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में आयुष चिकित्सा को शामिल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। इससे लोगों को आयुर्वेद और अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का लाभ सुलभ रूप से मिल सकेगा।

आयुष विश्वविद्यालय और शोध केंद्र की दिशा में पहल

प्रदेश सरकार सात आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी विभाग स्थापित करने, आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग महाविद्यालय शुरू करने और Balaghat में आयुष शोध केंद्र प्रारंभ करने की दिशा में कार्य कर रही है।

इसके अतिरिक्त जिन जिलों में आयुष सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ करने की योजना बनाई गई है। इन सभी कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा- भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना जरूरी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी के साथ-साथ भारतीय परंपरा से जुड़ी चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। प्रदेश में अनेक आयुर्वेदाचार्य वर्षों से सफल उपचार कर रहे हैं और बिना शल्य चिकित्सा के भी लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं बल्कि जीवनशैली है और जो नागरिक आजीवन आयुष पद्धति का लाभ ले रहे हैं, उन्हें भी प्रेरक कार्यक्रमों से जोड़ा जाना चाहिए।

बैठक में आयुष मंत्री Inder Singh Parmar, मुख्य सचिव Anurag Jain, अपर मुख्य सचिव Neeraj Mandloi, प्रमुख सचिव आयुष Shobhit Jain सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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