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मीसाबंदी हाजी अ. करीम को मरणोपरांत सम्मान – कलीम कामरेड को सौंपा गया म.प्र. शासन का ताम्रपत्र

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानी को मिला राज्य सरकार का सम्मान

Seoni 26 June 2025
सिवनी यशो:- भारत में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। इसी क्रम में सिवनी निवासी स्व. हाजी अ. करीम, जिन्हें मीसाबंदी के रूप में जाना जाता है, को मरणोपरांत मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा भेजा गया सम्मान पत्र एवं ताम्रपत्र उनके पुत्र कलीम कामरेड को सौंपा गया।

आपातकाल का काला अध्याय और लोकतंत्र की रक्षा

26 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों का दमन हुआ। इस कालखंड में मीसा के तहत हजारों लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में डाला गया। इन्हीं में से एक थे सिवनी जिले के हाजी अ. करीम, जिन्होंने लोकतंत्र को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जेल की यातनाएं झेली थीं।

सरकार ने दी श्रद्धांजलि और सम्मान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए राज्य के सभी मीसाबंदियों को सम्मान पत्र एवं ताम्रपत्र भेंट करने का निर्णय लिया है।
स्वर्गीय हाजी अ. करीम अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके योगदान को भूला नहीं गया। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनके पुत्र कलीम कामरेड के निवास पहुंचकर यह सम्मान सौंपा।

कलीम कामरेड के घर पहुंचा प्रशासन

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर, जिला प्रशासन की टीम विशेष रूप से कलीम कामरेड के आवास पर पहुंची, और लोकतंत्र की रक्षा में उनके पिता हाजी अ. करीम द्वारा किए गए योगदान की स्मृति में यह ताम्रपत्र भेंट किया।
इस अवसर पर कलीम कामरेड ने म.प्र. शासन का आभार प्रकट करते हुए कहा कि —

“यह केवल सम्मान पत्र नहीं, बल्कि उन मूल्यों और सिद्धांतों की स्वीकृति है जिनके लिए हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया।”

जनमानस में सकारात्मक संदेश

आपातकाल के इस ऐतिहासिक स्मरण और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान ने समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नई चेतना जगाई है।
सिवनी जिले के अन्य मीसाबंदियों को भी क्रमश: इस तरह से सम्मानित किया जा रहा है।

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