हजारों लीजधारकों की आवाज बने विधायक मुनमुन, बोले— “शीघ्र निकलेगा व्यावहारिक समाधान”
नजूल नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने प्रशासनिक स्तर पर तेज हुई कवायद
नजूल पट्टा नवीनीकरण सिवनी – फॉर्म-एच में नहीं नगर पालिका का जिक्र, फिर हजारों लीजधारकों को क्यों झेलनी पड़ रही अतिरिक्त शर्तों की मार?
सिवनी यशो :- नजूल पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया को लेकर शहर में उठ रहे सवाल अब और तेज हो गए हैं। एक ओर हजारों लीजधारक महीनों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, दूसरी ओर यह प्रश्न भी खड़ा हो गया है कि आखिर नजूल नवीनीकरण की मूल प्रक्रिया में जिन शर्तों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, वे आज सबसे बड़ी बाधा कैसे बन गईं?
जानकारों के अनुसार मध्यप्रदेश में नजूल भूमि के पट्टा नवीनीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-एच में भूमि, पट्टाधारी, लीज अवधि, भू-भाटक और नवीनीकरण की शर्तों का उल्लेख है, लेकिन इसमें नगर पालिका से भवन निर्माण स्वीकृति अथवा अन्य दस्तावेजों की अनिवार्यता का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं देता। इसके बावजूद वर्तमान में यही शर्तें हजारों लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी हैं।
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नवीनीकरण कम, उलझन ज्यादा
शहर के नागरिकों का कहना है कि वे नवीनीकरण कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रक्रिया ऐसी बना दी गई है कि फाइलें आगे बढ़ने के बजाय अटकती चली जा रही हैं। जिन मकानों और दुकानों का निर्माण कई दशक पहले हुआ, उनके स्वामियों से आज ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो कई मामलों में उपलब्ध ही नहीं हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवनों का निर्माण उस दौर में हुआ था, जब वर्तमान नियम और प्रक्रियाएं लागू भी नहीं थीं, तब आज उन्हीं दस्तावेजों के अभाव में लोगों को राहत से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
🗣️ समाधान की दिशा में प्रयास जारी : विधायक दिनेश राय मुनमुन
नजूल पट्टा नवीनीकरण को लेकर बढ़ रही नागरिकों की परेशानियों के बीच विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कहा कि यह समस्या वास्तव में गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में चेंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था और व्यापारियों तथा आम नागरिकों की समस्याओं से अवगत कराया था।
विधायक श्री राय ने कहा कि नजूल पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर प्रशासन से लगातार चर्चा की जा रही है। उनका प्रयास है कि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े और प्रक्रिया को यथासंभव सरल बनाया जाए।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शीघ्र ही इस विषय पर सकारात्मक और व्यवहारिक समाधान निकलेगा। श्री राय ने स्पष्ट किया कि पट्टों का नवीनीकरण पूरी तरह वैध और निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं का सामना न करना पड़े।
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एक वर्ष बीता, परिणाम नगण्य
मार्च 2025 में बड़े स्तर पर नवीनीकरण प्रक्रिया शुरू की गई थी। हजारों लोगों ने आवेदन जमा किए, दस्तावेज जुटाए और उम्मीद की कि वर्षों पुरानी लीज का नवीनीकरण हो जाएगा। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नवीनीकरण की रफ्तार इतनी धीमी है कि शहर में निराशा का माहौल बन गया है।
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लोग सवाल पूछ रहे हैं कि यदि वर्तमान गति यही रही तो क्या सभी प्रकरणों के निपटारे में कई वर्ष और लग जाएंगे?
जनता परेशान, जिम्मेदार खामोश
नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवारों के सामने भविष्य की चिंता खड़ी है। जिन मकानों और प्रतिष्ठानों पर पीढ़ियों से परिवार आश्रित हैं, उनके मालिक आज भी अनिश्चितता में जी रहे हैं। शहर में चर्चा है, सवाल हैं, नाराजगी है, लेकिन समाधान दिखाई नहीं दे रहा।
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सबसे अधिक हैरानी इस बात को लेकर व्यक्त की जा रही है कि हजारों परिवारों को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे पर अब तक कोई व्यापक जनचर्चा या ठोस पहल सामने नहीं आई। लोग पूछ रहे हैं कि जब पूरा शहर प्रभावित है तो उनकी आवाज कौन उठाएगा?
राहत की नहीं, पुनर्विचार की जरूरत
नागरिकों और विधि जानकारों का मानना है कि नजूल नवीनीकरण का उद्देश्य लोगों को कानूनी सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन्हें कागजी जटिलताओं के जाल में उलझाना। यदि प्रक्रिया को सरल और व्यवहारिक नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
आज सिवनी का सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या नजूल नवीनीकरण नागरिकों को राहत देने के लिए शुरू किया गया था या उन्हें अंतहीन प्रक्रियाओं में उलझाने के लिए?


