“नगरपालिका में फिर बवाल, अपनों ने ही खोली पोल!” अमृत 2.0 के कामों पर शिकायत से हड़कंप
विरोधी दल ही नहीं, सत्ता पक्ष के पार्षद भी नाराज! परिषद की कार्यप्रणाली पर पहले जूतम-पैजार से लेकर अदालत तक पहुंच चुके हैं विवाद, अब अमृत 2.0 के कामों की गुणवत्ता और भुगतान पर गंभीर सवाल
सिवनी नगरपालिका में फिर घमासान, अमृत 2.0 के कामों पर सत्ता पक्ष ने उठाए सवाल
Seoni 10. September 2026
सिवनी यशो:- सिवनी नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि इस बार सवाल उठाने वालों में केवल विपक्षी पार्षद ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष से जुड़े पार्षद भी शामिल बताए जा रहे हैं। अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे Comprehensive Water Supply Scheme के कार्यों में कथित अनियमितता, गुणवत्ता की अनदेखी और भुगतान को लेकर एक सभापति द्वारा आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा भाजपा नेतृत्व तक शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत सामने आने के बाद नगरपालिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
नगरपालिका परिषद की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष कोई नया नहीं है। परिषद की बैठकों और कामकाज को लेकर पहले भी विवाद सार्वजनिक होते रहे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक रूप से जूतम-पैजार जैसी अप्रिय घटना तक सामने आ चुकी है और विवाद न्यायालय की चौखट तक भी पहुंच चुके हैं। ऐसे माहौल में अब सत्ता पक्ष के ही पार्षदों द्वारा विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाना परिषद के लिए गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत माना जा रहा है।
सत्ता पक्ष में भी उबल रहा असंतोष?
नगरपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी पार्षदों की नाराजगी तो अक्सर सामने आती रही है, लेकिन अब सत्ता पक्ष के कुछ पार्षद भी कथित तौर पर कामकाज के तरीके और विकास कार्यों में गुणवत्ता की कथित उपेक्षा को लेकर बेहद असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।
इन पार्षदों का मानना है कि जनता के पैसे से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। यही असंतोष अब शिकायतों के रूप में सामने आने लगा है।
अमृत 2.0 ने बढ़ाई बेचैनी
ताजा मामला केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत 2.0 योजना से जुड़ा है। नगर पालिका के स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग की सभापति एवं वार्ड क्रमांक 4 की भाजपा पार्षद राजश्री संदेश बास्सा ने 1 सितंबर 2026 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त तथा नगर पालिका परिषद सिवनी के अध्यक्ष को पत्र भेजकर Comprehensive Water Supply Scheme के कार्यों की जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पाइपलाइन में डीपीआर एवं तकनीकी मापदंडों के अनुसार आवश्यक एंटी-कोरॉसिव कोटिंग नहीं की जा रही है। इसके अलावा फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण को भी डीपीआर के अनुरूप नहीं होने तथा गुणवत्ता मानकों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
सबसे गंभीर सवाल भुगतान को लेकर उठाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कथित रूप से घटिया कार्य होने के बावजूद संबंधित ठेकेदार को भुगतान किया जा रहा है।
‘आज जांच नहीं हुई तो कल भुगतेगा शहर’
शिकायतकर्ता पार्षद ने आशंका जताई है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में शहर को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। पाइपलाइन में बार-बार टूट-फूट, जलापूर्ति बाधित होने और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण पानी नहीं मिलने जैसी समस्याओं की आशंका जताई गई है।
यानी सवाल सिर्फ निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर की पेयजल व्यवस्था और जनता के करोड़ों रुपये के निवेश की उपयोगिता का भी है।
डीपीआर से लेकर भुगतान तक मांगा हिसाब
शिकायत में संबंधित अधिकारियों से योजना की डीपीआर, टेंडर, कार्यादेश, मटेरियल टेस्ट रिपोर्ट तथा अब तक किए गए भुगतान का विवरण मांगा गया है। साथ ही कार्य की तृतीय पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने और जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने की मांग की गई है।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारी अथवा ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य डीपीआर और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप कराने की मांग भी की गई है।
भाजपा सरकार की छवि का भी सवाल
शिकायत में पार्षद ने इस मामले को सिर्फ नगरपालिका का तकनीकी विवाद नहीं माना है। उन्होंने कहा है कि अमृत 2.0 केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य घर-घर शुद्ध और साफ पानी पहुंचाना है। ऐसे में यदि योजना के कार्यों में अनियमितता या गुणवत्ता से समझौता होता है तो इसका सीधा असर सरकार की छवि पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि सत्ता पक्ष की पार्षद द्वारा ही उच्च अधिकारियों और भाजपा नेतृत्व तक शिकायत पहुंचना नगरपालिका के भीतर चल रहे असंतोष को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायत के बाद किस पर गिरेगी गाज?
इस पूरे मामले में अब निगाहें नगरपालिका और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की तकनीकी जांच होती है या नहीं, भुगतान पर रोक लगती है या नहीं और यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आता है—यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल इतना तय है कि सिवनी नगरपालिका की अंदरूनी खींचतान अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रही। पुराने विवादों की पृष्ठभूमि में सत्ता पक्ष के भीतर से उठी गुणवत्ता संबंधी शिकायत ने परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या अमृत 2.0 के कामों की निष्पक्ष तकनीकी जांच होगी, या शिकायत भी नगरपालिका के दूसरे विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी?
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