यज्ञ, दान और सत्कर्म का फल ही जीव के साथ जाता है : शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती
महाशिवरात्रि महोत्सव पर गुरुधाम सिवनी में धर्मसभा, सदगुरु को बताया परमात्मा दर्शन का माध्यम

सिवनी यशो :- नहीं यज्ञ, दान और सत्कर्म का फल ही जीव के साथ जाता है। परमात्मा का परोक्ष दर्शन केवल सद्गुरु और शास्त्रों के माध्यम से ही संभव है। ज्ञान प्राप्ति के लिए सबसे पहले अंतरात्मा की शुद्धि आवश्यक है।
ये प्रेरक विचार शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर गुरुधाम सिवनी स्थित गुरु रत्नेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।
महाशिवरात्रि कल्याण करने वाली रात्रि
धर्मसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य महाराज ने कहा कि महाशिवरात्रि कल्याण करने वाली रात्रि है और शिव तत्व स्वयं कल्याण स्वरूप है। संसार की अनित्य वस्तुओं में सुख नहीं है, केवल नित्य परमात्मा तत्व में ही वास्तविक आनंद प्राप्त होता है।
मन पर नियंत्रण से ही जीवन का कल्याण
आप श्री ने कहा कि जागृत अवस्था में चंचल मन अनेक प्रकार की कामनाएँ करता है। मन ही शरीर को संचालित करता है और मन रूपी घोड़े को वश में करने पर ही जीवन का कल्याण संभव है। मनुष्य देह परमात्मा द्वारा सीमित समय के लिए प्रदान की गई अमूल्य मणि है, इसी से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
ब्रह्मलीन गुरुदेव का पुण्य स्मरण
इस अवसर पर प्रातः स्मरणीय स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का पुण्य स्मरण करते हुए कहा गया कि इसी गुरुधाम में उनके पावन सानिध्य में गुरु रत्नेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। तत्वदर्शी गुरु का ज्ञान जन्म-जन्मांतर के पापों को भस्म कर देता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
धर्मसभा में सिवनी जिले सहित आसपास के ग्रामों एवं अन्य नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर-नारी उपस्थित रहे। आचार्य पंडित हितेंद्र शास्त्री जी के आचार्यत्व में पादुका पूजन एवं माल्यार्पण किया गया।
आगामी धार्मिक आयोजनों की जानकारी
मंच संचालन पंडित ओमप्रकाश तिवारी ने किया तथा भजन के माध्यम से श्रीमती आशा देवी सनोडिया ने आभार व्यक्त किया। पंडित हितेंद्र शास्त्री जी ने आगामी द्वारकाधीश मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एवं सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आयोजन की विस्तृत जानकारी श्रद्धालुओं को दी।



