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धर्मसिवनी

अज्ञानता रूपी रोगों को ज्ञान से गुरु ही दूर कर सकता है – निर्विकल्प स्वरूप

सिवनी यशो:- श्रीमद भागवत कथा औषधि है जो शुकदेव रूपी चिकित्सक ने परीक्षित रूपी रोगी को दी और अज्ञानता रूपी रोग को ज्ञान के प्रकाश से दूर कर दिया
उक्ताशय की बाते अपने प्रवचनों में द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परम कृपापात्र शिष्य ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने जैतपुर में चल रही भागवत कथा के दौरान कही, ब्रह्मचारी जी महाराज ने आज चतुर्थ दिवस की कथा में कहा कि अज्ञानता रूपी रोगों को ज्ञान से गुरु ही दूर कर सकता है जैसे शुकदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित की किये।
आगे कथा के विभिन्न प्रसंगों को सुनते हुए ब्रह्मचारी जी भगवान नरसिंह के अवतार की कथा बताया कि भक्त प्रह्लाद जिज्ञासु साधक थे और उनके पिता हिरण्यकश्यपु महामोह है यह मोह समस्त व्याधियों का मूल है और मोह ही साधक को प्रताडि़त करता है अर्थात पुत्र प्रह्लाद को पिता हिरण्यकश्यपु ने अनेको प्रकार से प्रताडि़त किया लेकिन साधक प्रह्लाद ने भगवान की भक्ति नही छोड़ी, फलस्वरूप भगवान ने नरसिंह अवतार धारण कर अपने भक्त की रक्षा की भगवान ने चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इनके के चार महावाक्य प्रज्ञानं ब्रह्म, अहं ब्रह्मास्मि, तत् त्वम् असि, अयम आत्मा ब्रह्म नामक प्रमाण रूपी नाखूनों से महामोह रूपी हिरण्यकश्यपु का वध किया।
आज कथा के विश्राम पूर्व भगवान श्री कृष्ण का जन्म कथा प्रसंग में श्रद्धालुओ ने भजन-बधाइयां गाई गयी, उपहार लुटाए गए, आज कथा पंडाल को विशेष सुसज्जित किया गया था।

कोई सहन कर रहा है तो कमजोर मत समझो, यह उसके संस्कार है – निर्विकल्प स्वरूप

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