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लोग धर्म तो करना चाहते है मगर पाप को त्यागना नहीं चाहते – प्रसन्न सागर

गाय गोरी हो या काली दूध सफेद ही देती है 
अंर्तमना आचार्य प्रसन्न्ज्ञ सागर का ससंघ हुई आगवानी, मंगल प्रवचन में उमडा जन सैलाब

Seoni 8 December 2024

सिवनी यशो:- धर्म का मार्ग (path of religion) सरल भी है और कठिन भी है लेकिन इसके लिए हमारा मन की महत्वपूर्ण भूमिका हुआ करती है लोग धर्म तो करना चाहते है मगर पाप को त्यागना नहीं चाहते ऐसे में हमे मोक्ष की प्राप्ति कैसे होगी। अगर धर्म सरल है तो दुनिया के हर इंसान धर्म क्यो नहीं करते और धर्म को हम कठिन मानते है तो फिर साधु संत इस मार्ग पर क्यों जाते है हमें संतो के चरण की वंदना की तो आशा रहती है मगर चरण के साथ हम आचरण नहीं बदलते, आज स्वाध्याय मेंभी परिवर्तन आया है। हमारे लिए चित की निर्मलता बहुत जरूरी है । उक्त उद्गार अंर्तमना आचार्य प्रसन्न सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

आचार्य श्री ने कहा कि अगर मंदिर जाकर या संतो की वाणी सुनकर हमारे मन में परिवर्तन नहीं आया तो हम वैसे ही है जैसे कोल्हू के बैल होते है हमे जीवन में तीन बातों का ध्यान रखना है कि जब मंदिर जाये तो जूते चप्पल पहनकर ना जाये, मंदिर में मोबाइल ना ले जाये और भोजन करते समय मोबाइल का उपयोग ना करें।

लोग धर्म तो करना चाहते है मगर पाप को त्यागना नहीं चाहते - प्रसन्न सागर - Seoni News

आपने कहा कि गरीब की परिभाषा वह है कि जिसके पास कुछ नहीं है और अमीर वो है जो सब कुछ होकर भी उसका भोग नही कर रहा लेकिन धर्म कहता है कि आपके पास धर्म करने के समस्त साधन होने के बाद भी धर्म नहीं कर रहे वो सबसे बडा गरीब है और अमीर वो है जो साधुसंत है जिसके पास धन वैभव होने के बाद भी त्याग करे वह अमीर है आपने कहा गोबर में चांदी का वर्क लगाने से वह मिठाई नहीं बन जाती मिठाई पर चांदी लगाने से उसकी सुदरता बढ़ जाती है।

इस अवसर पर एलक वणी सागर महाराज ने कहा कि सूरज तपेरे तपेरे साथी… तुझको तपना होगा…। मुनिश्री सहज सागर ने कहा कि पुण्य हेय नही अपादेय है सिवनी के गगनचुम्बी कलश और यहां के विद्धान पं सुमेरूचंद्र दिवाकर ने जो हमें और समाज को दिया उसी का परिणाम है कि यहां की शान पूरे भारत में है। आचार्य अंर्तमना प्रसन्न सागर जी एक ऐसे साधु है जिन्होंने 506उपवास निंरतर किये है सिंह उपवास के रूप में आपकी पहचान है आपके संघ में चर्तुविध संघ समाहित है संत समागम तभी सार्थक होगा जब हम उनसे कुछ ग्रहण करेंगे।

मुनि पीयूष सागर ने कहा कि आचार्य श्री प्रसन्न सागर तपस्विीयों में तपस्वी है सिद्ध चक्र विधान की तरह सिद्ध है जिस तरह गाय किसी भी रंग की हो वह दूध सफेद ही देती है इसी तरह धर्म कोई भी हो मगर वह हमें मोक्ष की ओर ही मार्ग दिखाता है।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर संस्कृति जैन ने महाराजश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित किया, इस मंगल प्रवास के दौरान नागपुर जबलपुर छिंदवाडा बालाघाट बरघाट भोमा आदि से लोग पहुचे। छिंदवाडा चौक से आगवानी के दौरान संकल जैन समाज ने की जगह जगह पुष्प वृष्टि एवं चरण प्रक्षालन का कार्यक्रम आयोजित किया गया आयोजन में दिगबर जैन पंचायत कमेठी जनरल पंचायत, नवयुवक मंडल जैन मित्र मंडल सहित महिला एवं बालिका मंडल का विशेष योगदान रहा।

Dainikyashonnati

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