पिता से सीखा हुनर, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से मिला नया सहारा
22 वर्षों से कारपेंटरी के काम में जुटे विनीत विश्वकर्मा को पीएम विश्वकर्मा योजना से मिला प्रशिक्षण, पहचान और एक लाख रुपये का ऋण
पिता से सीखा हुनर, PM Vishwakarma Yojana से विनीत को मिला नया सहारा
Seoni 17 September 2026
सिवनी यशो:- लकड़ी, औजार और मेहनत से जुड़ी कारपेंटरी की कला विनीत विश्वकर्मा के लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है। पिता को वर्षों तक लकड़ी का काम करते देखकर उन्होंने भी इसी हुनर को अपना जीवन और रोजगार बना लिया।
कक्षा 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद पिता के साथ काम सीखते-सीखते यही पारंपरिक हुनर उनकी पहचान बन गया। आज करीब 22 वर्षों से कारपेंटरी का कार्य कर रहे सिवनी के विनीत विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने का नया अवसर मिला है।

मंगलीपेठ, अम्बेडकर वार्ड निवासी विनीत विश्वकर्मा, पिता रमेश विश्वकर्मा बताते हैं कि उनके परिवार में कारपेंटरी का काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। बचपन में पिता को लकड़ी का काम करते देखकर उन्होंने इस कला को समझना शुरू किया। पढ़ाई के बाद वे पिता के साथ काम में हाथ बंटाने लगे और धीरे-धीरे यही हुनर उनके जीवन का आधार बन गया।
योजना की जानकारी मिली तो किया ऑनलाइन आवेदन
वर्षों तक मेहनत कर अपने काम को आगे बढ़ाने वाले विनीत को जब प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा पहचान पत्र, प्रशिक्षण और प्रशिक्षण उपरांत प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। इससे उन्हें अपने पारंपरिक कौशल को औपचारिक पहचान मिलने का अनुभव हुआ।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में कारपेंटर सहित 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। योजना के तहत कारीगरों को पहचान पत्र एवं प्रमाण-पत्र के साथ कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन और ऋण सहायता जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
एसबीआई से मिला एक लाख रुपये का ऋण
विनीत के अनुसार योजना के अंतर्गत भारतीय स्टेट बैंक, बारापत्थर शाखा से उन्हें कारपेंटर कार्य के लिए एक लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। वे बताते हैं कि यह ऋण 18 मासिक किश्तों में चुकाया जाना है और वे नियमित रूप से किश्तों का भुगतान कर रहे हैं।
आधिकारिक योजना प्रावधानों के अनुसार प्रथम चरण में अधिकतम एक लाख रुपये का ऋण 18 माह की अवधि के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद पात्रता की शर्तें पूरी होने पर दूसरे चरण में दो लाख रुपये तक की ऋण सहायता का प्रावधान है।
वर्तमान में विनीत सी.वी. रमन वार्ड, बाबूजी नगर स्थित अपने निजी वर्कशॉप में कारपेंटरी का कार्य कर रहे हैं।
हुनर वही, लेकिन आगे बढ़ने का भरोसा मिला
विनीत के लिए यह सहायता केवल एक लाख रुपये का ऋण नहीं है। उनके लिए यह पिता से विरासत में मिले हुनर को आगे बढ़ाने का भरोसा है। वर्षों से हाथों में रहे औजार और अनुभव आज भी उनके साथ हैं, लेकिन अब अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, पहचान और सरकारी योजना के सहयोग का एक अतिरिक्त आधार भी मिला है।
वे बताते हैं कि परंपरागत कारीगरों के काम को पहचान देने वाली इस योजना से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का हौसला मिला है। बेहतर तरीके से काम करने और अपने हुनर को नई जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का अवसर भी उन्हें मिला है।
प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार
अपने अनुभव साझा करते हुए विनीत विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों के हुनर को पहचान देने के साथ उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि उनके जैसे कारीगरों के लिए सरकार की यह पहल अपने पारंपरिक व्यवसाय को बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने में सहायक बनी है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।
विरासत के हुनर को मिला आगे बढ़ने का अवसर
पिता से विरासत में मिला हुनर, वर्षों की मेहनत और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से मिला सहयोग—इन तीनों ने विनीत विश्वकर्मा की कहानी को नई दिशा दी है।
उनके हाथों में आज भी वही औजार हैं और वही पारंपरिक हुनर है, लेकिन अब उस हुनर को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, पहचान और वित्तीय सहायता का सहारा भी उनके साथ है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य हाथों और औजारों से काम करने वाले पारंपरिक कारीगरों को पहचान, कौशल उन्नयन, टूलकिट और ऋण सहित समग्र सहायता उपलब्ध कराना है।
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