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छिंदवाड़ा के निजी अस्पतालों में महंगा इलाज, सुविधाओं पर मरीजों ने उठाए सवाल

मरीजों के परिजनों का दावा—नागपुर जैसी फीस, लेकिन सुविधाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं; आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलने की भी शिकायत

छिंदवाड़ा में निजी अस्पतालों का महंगा इलाज, सुविधाओं पर सवाल

Chhindwara 12 September 2026
छिंदवाड़ा  यशो:- मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद छिंदवाड़ा शहर में निजी अस्पतालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहर की प्रमुख सड़कों के आसपास मल्टी स्पेशलिटी और अन्य निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इलाज के लिए इन अस्पतालों में पहुंच रहे कुछ मरीजों और उनके परिजनों ने इलाज के खर्च, उपलब्ध सुविधाओं और आयुष्मान भारत योजना के लाभ को लेकर सवाल उठाए हैं।

मरीजों के परिजनों का कहना है कि निजी अस्पतालों में उपचार का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और कई मामलों में उन्हें नागपुर के बड़े अस्पतालों के बराबर भुगतान करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, उनके अनुसार अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को मिलने वाली सभी आवश्यक सुविधाएं उसी स्तर की नहीं हैं।

जांच के बाद भी बीमारी का पता नहीं चलने की शिकायत

कुछ मरीजों के परिजनों ने दावा किया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की कई तरह की जांच होने के बावजूद बीमारी का स्पष्ट कारण और उपचार की दिशा तय नहीं हो सकी। परिजनों के अनुसार जब ऐसे मरीजों को बाद में नागपुर ले जाया गया तो वहां कम समय में बीमारी का पता लगाकर उपचार शुरू किया गया।

हालांकि, ये मरीजों और उनके परिजनों के अनुभव एवं आरोप हैं। अस्पतालों की ओर से इन मामलों में चिकित्सकीय स्थिति और उपचार संबंधी अलग पक्ष हो सकता है।

डॉक्टरों की संख्या बढ़ी, फिर भी मरीजों की संतुष्टि पर सवाल

मेडिकल कॉलेज के बाद शहर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ी है। कई चिकित्सक निजी अस्पतालों और अपने क्लीनिकों में भी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद कुछ मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पतालों में उन्हें अपेक्षित चिकित्सकीय व्यवहार और उपचार नहीं मिल पा रहा है।

मरीजों के बीच यह भी चर्चा है कि जिन चिकित्सकों से वे निजी स्तर पर उपचार कराते हैं, उनके अस्पतालों में भर्ती होने के बाद उन्हें उपचार व्यवस्था को लेकर अलग अनुभव मिलता है। इन शिकायतों को लेकर मरीजों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के साथ मरीजों के प्रति व्यवहार और जवाबदेही भी बेहतर होनी चाहिए।

भर्ती मरीजों के लिए कैंटीन सुविधा पर भी सवाल

निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर सामने आई है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि शहर के कई निजी अस्पतालों में कैंटीन या नियमित भोजन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण उन्हें बाहर से खाना लाना पड़ता है।

लालबाग चौक के पास स्थित श्री कृष्णा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधन से कैंटीन सुविधा के संबंध में जानकारी लेने पर बताया गया कि मरीज के परिजनों के कहने पर बाहर से भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

इसी तरह पुराना बैल बाजार स्थित निर्मला हॉस्पिटल में भी कैंटीन सुविधा उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई। कुछ अस्पताल मुख्य मार्गों पर स्थित होने के कारण मरीजों के परिजनों को सड़क पार कर चाय-नाश्ता या भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है।

आयुष्मान भारत योजना के लाभ को लेकर भी शिकायत

मरीजों के परिजनों ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ अस्पतालों में योजना के तहत उपचार उपलब्ध होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीज के भर्ती होने के बाद योजना का लाभ नहीं मिल पाता और उपचार का खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है।

इस संबंध में संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आयुष्मान योजना के पात्र मरीज को योजना के तहत उपचार उपलब्ध हुआ या नहीं, इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और अस्पताल के अधिकृत पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगी।

निजी अस्पतालों की सुविधाओं और शुल्क की जांच की मांग

मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि निजी अस्पतालों में उपचार के लिए बड़ी राशि ली जा रही है तो उसके अनुरूप स्वच्छता, भोजन, मरीजों के परिजनों के लिए मूलभूत सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और पारदर्शी बिलिंग भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से शहर के निजी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, उपचार शुल्क, आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन तथा मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सेवाओं की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

नोट: इस रिपोर्ट में अस्पतालों और चिकित्सकों से जुड़े बिंदु मरीजों/परिजनों की शिकायत एवं दावों के आधार पर हैं। संबंधित अस्पताल प्रबंधन अथवा स्वास्थ्य विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा ।

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