स्मार्ट मीटरों के खिलाफ जनाक्रोश सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा
व्यापारियों का बंद, नागरिकों का हुजूम और प्रशासन पर दबाव
Seoni 06 August 2025
कान्हीवाड़ा यशो:- स्मार्ट मीटरों के खिलाफ जनाक्रोश सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा।
व्यापारियों के पूर्ण बंद और हज़ारों नागरिकों की भागीदारी से यह विरोध एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले बैठा।
“स्मार्ट मीटर हटाओ – जनता को बचाओ” के नारों से कान्हीवाड़ा की सड़कें गूंज उठीं, और बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सामने आया।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन?
सुबह बाजार चौक से प्रारंभ हुई रैली ने बस स्टैंड, मुख्य मार्गों और प्रमुख चौराहों से गुजरते हुए कान्हीवाड़ा विद्युत मंडल कार्यालय का रुख किया।
रैली के दौरान लोगों ने स्मार्ट मीटर की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध जताया।
लोगों की प्रमुख शिकायतें
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है।
कई उपभोक्ताओं को पुराने बिल की तुलना में 8 से 10 गुना अधिक राशि चुकानी पड़ रही है।
इसके अलावा, बिजली आपूर्ति में अनियमितता से घरेलू और व्यापारिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
प्रमुख माँगें जो ज्ञापन में रखी गईं
स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर फिर से लगाए जाएं
अनियमित बिजली कटौती पर रोक लगे
340 की अतिरिक्त पेनाल्टी तत्काल समाप्त की जाए
विद्युत विभाग में स्टाफ की कमी दूर की जाए
आगे की स्मार्ट मीटर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए
अब तक की अवैध वसूली की राशि उपभोक्ताओं को लौटाई जाए
प्रशासन को चेतावनी सहित सौंपा गया ज्ञापन
रैली का समापन बस स्टैंड पर हुआ, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने सिवनी विद्युत विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुभाष राय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि माँगों पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भारी जनसमर्थन, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा
करीब 2000 से अधिक नागरिकों की सहभागिता और पूर्ण व्यापारिक बंद ने इस आंदोलन को एक जन लहर में बदल दिया।
सुरक्षा के लिहाज़ से केवलारी एसडीओपी, कान्हीवाड़ा नगर निरीक्षक, सिवनी तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी अपने अमले के साथ मौजूद रहे।
साथ ही फायर ब्रिगेड को भी सतर्क स्थिति में रखा गया।
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इस दौरान सिवनी-मंडला रोड पर कुछ देर के लिए चक्का जाम जैसी स्थिति बनी, जिससे ट्रैफिक बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
आंदोलन का प्रभाव: प्रशासन और राजनीति पर असर तय
इस व्यापक आंदोलन ने स्पष्ट कर दिया है कि काँहीवाड़ा की जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है।
आंदोलन में शामिल एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा:
“जनता जाग चुकी है, अब चुप नहीं बैठेगी!”
आंदोलन के दौरान लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर रही कि यदि आगामी एक महीने के भीतर समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है,
जो न सिर्फ प्रशासनिक छवि, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा।

अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं —
क्या जनता की माँगें मानी जाएँगी या यह जन लहर और तेज होगी?
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