सावन झूला और हरियाली तीज उत्सव सम्पन्न
गायत्री मंदिर प्रांगण में मातृशक्ति ने पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया उत्सव
Seoni 06 August 2025
सिवनी यशो:- श्रावण मास की पावनता और हरियाली तीज की उमंग के साथ, गायत्री मंदिर प्रांगण मुंडापार में रविवार, 3 अगस्त को हरियाली तीज / सावन झूला महोत्सव का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस कार्यक्रम का आयोजन प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी समस्त मातृशक्ति बहनों द्वारा उत्साहपूर्वक किया गया।

कार्यक्रम में क्षेत्र की सैकड़ों बहनों ने अपनी सखियों-सहेलियों सहित सहभागिता की।
सभी ने हरी साड़ियाँ, महावर, मेंहंदी, और पारंपरिक श्रृंगार के साथ भाग लिया, जिससे वातावरण पूरी तरह सावन की हरियाली और उत्सव के रंगों से सराबोर नजर आया।
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कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ:
दीप प्रज्वलन एवं गायत्री पूजन:
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन व गायत्री माता के पूजन से हुआ। श्रद्धा और भक्ति भाव से वातावरण पवित्र हो उठा।
सुहाग सामग्री से स्वागत:
आने वाली सभी बहनों का पारंपरिक सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, कुमकुम) से स्वागत किया गया।
हरियाली तीज की प्रस्तावना व महत्व:
तेजस्विनी बहनों ने हरियाली तीज के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला।
नारी शक्ति पर संगोष्ठी:
“नारी सशक्तिकरण और समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका” विषय पर सारगर्भित संवाद हुआ।
सावन गीत:
एकल व सामूहिक रूप से बहनों ने सावन के पारंपरिक गीत गाए – “काहे को ब्याही बिदेश…” जैसे गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता:
रामायण व श्रीकृष्ण लीला से जुड़ी प्रश्नोत्तरी में बहनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
सुहाग गीत और पुष्प वर्षा:
सुहाग गीतों के साथ सभी बहनों पर फूलों की वर्षा की गई, जिससे उत्सव का सौंदर्य और बढ़ गया।
झाँकी और नृत्य:
सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत बहनों ने राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती की झाँकियाँ व नृत्य प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
मेमोरी गेम्स – तर्कशक्ति प्रदर्शन:
मजेदार तर्क आधारित खेलों में सभी बहनों ने अपनी स्मरण शक्ति का परिचय दिया।
झूला झूलने का उल्लास:
अंत में सभी बहनों ने सावन के पारंपरिक झूलों का आनंद लिया। गीतों और हँसी-ठिठोली से प्रांगण गूंजता रहा।
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प्रसाद वितरण और आभार
कार्यक्रम के समापन पर सभी बहनों को प्रसाद वितरित किया गया।
आयोजक मंडली द्वारा सभी बहनों और अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया गया।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज भी हमारी परंपराएँ नारी शक्ति के सौंदर्य, संस्कृति और समर्पण से जीवंत हैं।



