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केवलारी में 9.78 करोड़ की तीन सड़क परियोजनाओं पर सवाल: पहली बारिश में दो सड़कें और पुलिया क्षतिग्रस्त, एक ही ठेकेदार के कार्यों पर उठे गंभीर प्रश्न

मुख्यमंत्री के वर्चुअल लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद सामने आईं खामियां, मोहबर्रा–सारसडोल और जेवनारा–पां. छपारा मार्ग पर आवागमन प्रभावित, ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

केवलारी सड़क निर्माण गुणवत्ता – 9.78 करोड़ की तीन सड़क परियोजनाओं पर सवाल, पहली बारिश में दो सड़कें और पुलिया क्षतिग्रस्त

Seoni, 05 July 2026
सिवनी यशो:- केवलारी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 9 करोड़ 78 लाख रुपये की लागत से निर्मित तीन ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गई है।

इनमें से दो सड़कों और एक निर्माणाधीन पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। खास बात यह है कि तीनों सड़क परियोजनाओं का निर्माण एक ही निर्माण एजेंसी—जायसवाल कंस्ट्रक्शन, लामता (जिला बालाघाट) द्वारा किया जा रहा है।

केवलारी क्षेत्र में पहली बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हुई मोहबर्रा-सारसडोल सड़क और जेवनारा-पां. छपारा पुलिया
सिवनी के केवलारी क्षेत्र में लगभग 9.78 करोड़ की सड़क परियोजनाओं में पहली बारिश के बाद सड़क और पुलिया क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें पहली ही सामान्य बारिश का दबाव नहीं झेल सकीं।

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इससे निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण, विभागीय निगरानी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्यमंत्री के लोकार्पण के कुछ दिन बाद ही खुलने लगीं खामियां

गौरतलब है कि 1 जुलाई 2026 को सिवनी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से जिन ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण किया था, उनमें शामिल थीं—

  • मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग (2 किमी) – 3.94 करोड़
  • जेवनारा–पां. छपारा मार्ग (3 किमी) – 3.42 करोड़
  • मलारी–पौंडी मार्ग (2 किमी) – 2.42 करोड़

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इन तीनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 9.78 करोड़ है। अब इनमें से दो परियोजनाओं में शुरुआती बारिश के बाद सामने आई क्षति ने निर्माण गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

केवलारी क्षेत्र में पहली बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हुई मोहबर्रा-सारसडोल सड़क और जेवनारा-पां. छपारा पुलिया
सिवनी के केवलारी क्षेत्र में लगभग 9.78 करोड़ की सड़क परियोजनाओं में पहली बारिश के बाद सड़क और पुलिया क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग की।

3.94 करोड़ की मोहबर्रा–सारसडोल सड़क पहली बारिश में कटी

मोहबर्रा से सारसडोल के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क पहली ही बारिश में एक पुलिया के पास कट गई, जिससे दोनों गांवों के बीच आवागमन प्रभावित हो गया।

जिस स्थान पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण चल रहा है, उससे करीब 200 मीटर पहले सड़क बह गई।

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ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी खेतों और मकानों में घुस गया।

कई किसानों ने खरीफ फसलों और खेतों में बने तालाबों को भी नुकसान होने की बात कही है।

3.42 करोड़ के जेवनारा–पां. छपारा मार्ग पर भी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

इसी क्षेत्र के जेवनारा–पां. छपारा मार्ग पर निर्माणाधीन बघेड़ा नाला पुलिया भी पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई।

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पुलिया से आवागमन बंद होने के कारण बेलगांव, कातौली और आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया।

उनका कहना है कि केवल पुलिया ही नहीं, बल्कि सड़क पर बिछाई गई गिट्टी और डामर भी बारिश में बहते दिखाई दे रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

ठेकेदार का पक्ष: किसानों द्वारा डाली गई पाइप बनी वजह

इन आरोपों पर संबंधित ठेकेदार आशीष जायसवाल का कहना है कि निर्माण कार्य स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार किया गया है।

उनके अनुसार सड़क किनारे नाली निर्माण का प्रावधान नहीं था और पुल का निर्माण अभी प्रगति पर है।

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पां. छपारा मार्ग की पुलिया के संबंध में ठेकेदार का कहना है कि किसानों की सुविधा के लिए नाले में पाइप डाले गए थे, जिससे पानी का बहाव प्रभावित हुआ और पुलिया को नुकसान पहुंचा। उन्होंने क्षति को प्राकृतिक परिस्थितियों का परिणाम बताया।

ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि नुकसान केवल पुलिया तक सीमित होता तो बात अलग थी, लेकिन सड़क की गिट्टी और डामर का बहना भी निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए तथा यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

कुछ ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया कि निर्माण कार्य में लापरवाही के बावजूद समय से पहले लोकार्पण किया गया। वहीं कुछ लोगों ने ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रशासन और विभाग से जवाब का इंतजार

इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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अब जनता पूछ रही है…

  • लगभग 9.78 करोड़ की परियोजनाओं में पहली बारिश में ही खामियां क्यों सामने आईं?
  • क्या तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता निरीक्षण नियमानुसार हुआ था?
  • यदि निर्माण कार्य पूर्ण नहीं था तो लोकार्पण क्यों किया गया?
  • प्रभावित ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
  • यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर हैं कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर जनता के करोड़ों रुपये के उपयोग का जवाब देता है या नहीं।

https://siti.org/blog-121-february-2021-construction-re-construction-and-deconstruction/

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