सबीना बानों को मिल गया सहारा, अब कमाती है पाँच हजार रूपये रोज
Chhindwara 14 April 2025
छिंदवाड़ा यशो:- छिंदवाड़ा जिले के डोंगर परासिया नगर के वार्ड क्रमांक-08 में रहने वाली सबीना बानों ने अपनी मेहनत, हौसले और स्व-रोजगार योजना की मदद से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज वे अपनी किराना और कॉस्मेटिक्स की दुकान से महीने में नहीं बल्कि प्रतिदान 3 से 5 हजार रूपये तक का शुध्द लाभ प्राप्त कर रही हैं। उनकी कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और परिवार की खुशहाली के लिए संघर्ष करती है।
सबीना बानों ने भौतिकी (फिजिक्स) में पोस्ट ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन पारिवारिक हालात ऐसे नहीं थे कि वह अपने ज्ञान का सही उपयोग कर पाती। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्हें दूसरों के घरों में काम करना पड़ा। कभी 100 रुपये, कभी 200 रुपये और कभी-कभी 500 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती थी। महीनेभर काम करने पर भी बमुश्किल 2 से 5 हजार रुपये की कमाई होती थी। इतनी आमदनी में परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन था।
लेकिन कहते हैं न कि जब रास्ता नजऱ नहीं आता तब उम्मीदों की किरण राह दिखाती है। एक दिन सबीना का नगर पालिका डोंगर परासिया के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने सोचा, “क्यों न मैं भी इस योजना का लाभ उठाकर कुछ नया शुरू करूं?” इस योजना के अंतर्गत न केवल बिना गारंटी के लोन मिलता है, बल्कि सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है।
सबीना ने तुरंत नगर पालिका में 10,000 रुपये के लोन के लिए आवेदन किया। उन्हें यह लोन मिला और उन्होंने अपनी पहली छोटी किराना दुकान शुरू की। शुरुआत में सब कुछ नया था, लेकिन सबीना की मेहनत और लगन रंग लाई। कुछ समय बाद उन्होंने 20,000 रुपये का दूसरा लोन लिया और अपने व्यवसाय को और विस्तारित किया। सिर्फ इतना ही नहीं, सबीना ने अपनी थोड़ी-बहुत बचत भी इसमें जोड़ी और अपनी दुकान में सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक आईटम) का सामान भी रखना शुरू किया। आज उनकी दुकान किराना और कॉस्मेटिक दोनों का केंद्र बन चुकी है। ग्राहक बढ़े, बिक्री बढ़ी और अब उनकी दैनिक आमदनी 5,000 रुपये तक पहुंच गई।
अब सबीना न केवल अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज में एक नई पहचान भी बना चुकी है। उन्हें सरकार की अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है, जिससे उनका और उनके परिवार का स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
सबीना की कहानी यह बताती है कि यदि शिक्षित महिलायें ठान लें और समय पर सही निर्णय लिया जाए, तो कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है। उन्होंने न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि अपने बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य भी सुनिश्चित किया।
सबीना बानों, अब सिर्फ एक गृहिणी नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी है – आत्मनिर्भर भारत की सच्ची मिसाल।



