बिना अनुमति ऑपरेशन थियेटर और पैथोलॉजी लैब चलाने वालों की होगी जांच, औचक निरीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गठित किया दल
Seoni, 28 October 2026
सिवनी यशो:- जिले में निजी अस्पतालों, चिकित्सा क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों के बिना स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वाले संस्थानों को चेतावनी देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने औचक निरीक्षण के लिए जांच दल गठित किया है। निरीक्षण के दौरान पंजीयन प्रमाणपत्र, आवश्यक दस्तावेजों, स्वीकृत सेवाओं और निर्धारित मानकों की जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों के अनुसार, जिले में वर्तमान में 3 पैथोलॉजी लैब, 21 निजी चिकित्सालय और 75 चिकित्सा क्लीनिक पंजीकृत हैं। इसके बावजूद बिना पंजीयन स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन और पंजीकृत क्लीनिकों में निर्धारित अनुमति के विपरीत ऑपरेशन थियेटर तथा पैथोलॉजी लैब चलाए जाने की स्थिति विभाग के संज्ञान में आई है।
क्लीनिक का पंजीयन, हर सेवा की अनुमति नहीं
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 और उसके अंतर्गत लागू नियमों का पालन अनिवार्य है।
किसी चिकित्सा क्लीनिक का पंजीयन होने मात्र से उसमें ऑपरेशन थियेटर या पैथोलॉजी लैब संचालित करने की स्वतः अनुमति नहीं मिल जाती। इन सेवाओं के संचालन के लिए संबंधित नियमों के अनुसार आवश्यक अनुमति, निर्धारित पात्रता और मानकों का पालन करना जरूरी है।
औचक निरीक्षण में जांचे जाएंगे दस्तावेज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित निरीक्षण एवं जांच दल समय-समय पर निजी चिकित्सालयों, चिकित्सा क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब का औचक निरीक्षण करेगा। इस दौरान संस्थानों के पंजीयन प्रमाणपत्र, आवश्यक दस्तावेज, स्वीकृत सेवाओं और निर्धारित मानकों के अनुपालन की पड़ताल की जाएगी।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान केवल उन्हीं सेवाओं का संचालन करे, जिनके लिए उसे नियमानुसार अनुमति प्राप्त है।
नियमों का उल्लंघन मिला तो होगी वैधानिक कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने सभी संबंधित संस्थान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना पंजीयन या आवश्यक अनुमति के किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सेवा संचालित न करें। नियमों के विपरीत चल रही गतिविधियों को तत्काल बंद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निरीक्षण में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिनियम और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उल्लंघन की प्रकृति के अनुसार संस्थान का संचालन बंद कराने, पंजीयन संबंधी कार्रवाई करने तथा अन्य वैधानिक कदम उठाए जा सकते हैं।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना और मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब निगरानी का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि गठित जांच दल निरीक्षण के दौरान कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं। मरीजों की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना और उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।