फल-सब्जियों के संरक्षण और प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा, उपज की बर्बादी घटाने और बेहतर कीमत दिलाने की पहल
Seoni, 28 October 2026
सिवनी यशो:- जिले के अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषक परिवारों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा सोलर ड्रायर तकनीक को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना के माध्यम से प्रस्तावित इस परियोजना से जिले के 300 आदिवासी कृषक परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना नवंबर 2026 से प्रारंभ करने की तैयारी है।

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में प्रस्तावित इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी उपज के बेहतर उपयोग, संरक्षण और मूल्य संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराना है। परियोजना का क्रियान्वयन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आदिवासी वित्त एवं विकास निगम की योजना के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है।
जिले में स्थापित होंगे 300 सोलर ड्रायर
जिला उद्यानिकी अधिकारी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार के अनुसार, परियोजना के तहत संपूर्ण सिवनी जिले में 300 सोलर ड्रायर स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। इसका क्रियान्वयन प्राथमिकता के आधार पर कृषक समूह बनाकर किया जाएगा। परियोजना की प्रस्तावित अवधि तीन माह निर्धारित की गई है।
सोलर ड्रायर तकनीक की मदद से किसान फल, फूल, सब्जियों और औषधीय उत्पादों को सूर्य की ऊर्जा से सुखाकर सुरक्षित रख सकेंगे। इससे कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के प्रसंस्करण और संरक्षण में सहायता मिलेगी।
कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी होगी कम
किसानों के सामने अक्सर ऐसी स्थिति आती है, जब बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने के बावजूद भंडारण की सीमित व्यवस्था के कारण उन्हें अपनी फसल जल्द बेचनी पड़ती है। सोलर ड्रायर तकनीक इस चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।
उत्पादों को सुखाकर सुरक्षित रखने से उनकी उपयोग अवधि बढ़ाने और उचित समय पर विपणन करने के अवसर मिल सकते हैं। इससे किसानों को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में मदद मिलेगी।
उपज की बर्बादी कम करने और अतिरिक्त आय का अवसर
सोलर ड्रायर तकनीक से कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करने, गुणवत्ता बनाए रखने और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है। विशेष रूप से फल, सब्जियों और औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण से किसानों को अपनी उपज का बेहतर उपयोग करने के अवसर प्राप्त होंगे।
इस पहल से आदिवासी कृषक परिवारों को कृषि आधारित आजीविका के नए विकल्प उपलब्ध कराने और अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में कृषि उत्पादों के संरक्षण एवं प्रसंस्करण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।