Mon, 26 Oct 2026 | 11:08:40 PM
Dainik Yashonnati
Breaking News Exclusive
छींदा में पेयजल संरक्षण के लिए पंचायत की पहल, किसानों से आम सहमति; गर्मी में पानी की किल्लत रोकने पर जोर केवलारी: बाड़ी की जुताई करते समय पलटा ट्रैक्टर, 36 वर्षीय चालक की मौके पर दर्दनाक मौत 10 पदक जीतकर बढ़ाया जिले का गौरव महापौर विक्रम अहाके ने किया डॉ. श्रीनिवास मिश्र के काव्य संग्रह ‘ढाई आखर प्रेम बिना’ का विमोचन मोदी जी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा देश, खरगे माफी मांगें: प्रेम तिवारी गुल्लक से बैंक तक… बुड्ढी के ग्रामीणों को सिखाया बचत और सुरक्षित बैंकिंग का महत्व सिमरिया मंडी में 2 नवंबर को होगा , कलेक्टर ने तैयारियों की समीक्षा की शहरी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से बढ़ी चिंता, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मिले पगमार्क प्रदेश में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, सिवनी नगरपालिका पर मेहरबानी क्यों? 77 लाख की मोटर और 46 लाख की मरम्मत का हिसाब कौन देगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता पर टिप्पणी के विरोध में सिवनी में भाजपा का प्रदर्शन छींदा में पेयजल संरक्षण के लिए पंचायत की पहल, किसानों से आम सहमति; गर्मी में पानी की किल्लत रोकने पर जोर केवलारी: बाड़ी की जुताई करते समय पलटा ट्रैक्टर, 36 वर्षीय चालक की मौके पर दर्दनाक मौत 10 पदक जीतकर बढ़ाया जिले का गौरव महापौर विक्रम अहाके ने किया डॉ. श्रीनिवास मिश्र के काव्य संग्रह ‘ढाई आखर प्रेम बिना’ का विमोचन मोदी जी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा देश, खरगे माफी मांगें: प्रेम तिवारी गुल्लक से बैंक तक… बुड्ढी के ग्रामीणों को सिखाया बचत और सुरक्षित बैंकिंग का महत्व सिमरिया मंडी में 2 नवंबर को होगा , कलेक्टर ने तैयारियों की समीक्षा की शहरी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से बढ़ी चिंता, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मिले पगमार्क प्रदेश में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, सिवनी नगरपालिका पर मेहरबानी क्यों? 77 लाख की मोटर और 46 लाख की मरम्मत का हिसाब कौन देगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता पर टिप्पणी के विरोध में सिवनी में भाजपा का प्रदर्शन

पेयजल की प्राथमिकता से समझौता नहीं : छींदा में पेयजल संरक्षण के लिए पंचायत की पहल, किसानों से आम सहमति; गर्मी में पानी की किल्लत रोकने पर जोर

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Oct 26, 2026 11:30 am / Post views : 72

छींदा में पेयजल संरक्षण के लिए पंचायत की पहल, किसानों से आम सहमति; गर्मी में पानी की किल्लत रोकने पर जोर
शेयर करें:

नल-जल योजना के कुएं के पास नाले में सिंचाई के लिए लगी मिलीं कुछ मोटरें, प्रशासन और ग्रामीणों की चर्चा के बाद किसानों को समझाइश; खेती भी जरूरी, लेकिन पेयजल की प्राथमिकता से समझौता नहीं

Seoni, 26 October 2026

सिवनी/छींदा यशो:- गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए ग्राम पंचायत छींदा ने जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में पहल की है। जनपद पंचायत केवलारी के अंतर्गत आने वाले ग्राम छींदा में नल-जल योजना के कुएं के समीप स्थित नाले से सिंचाई किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पंचायत ने 24 अक्टूबर 2026 को संबंधित स्थल का निरीक्षण किया। मौके पर कुछ किसानों की सिंचाई मोटरें पाई गईं। इसके बाद प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच चर्चा हुई तथा आम सहमति के आधार पर किसानों को समझाइश देकर भविष्य में इस जलस्रोत से सिंचाई के लिए मोटर नहीं लगाने की अपील की गई।

img-20261026-wa0016-6adf8728100f7.webp

इस पहल का उद्देश्य किसी किसान के विरुद्ध कार्रवाई करना नहीं, बल्कि गांव के सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए पेयजल के स्रोत को सुरक्षित रखना है। किसानों को समझाया गया कि खेती और सिंचाई उनकी आजीविका के लिए आवश्यक हैं, लेकिन गांव के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिंचाई आवश्यक है, परंतु पेयजल की प्राथमिकता से समझौता नहीं किया जा सकता।

गर्मी में पेयजल संकट से बचने की अभी से तैयारी जरूरी

छींदा और आसपास के क्षेत्र में गर्मी के मौसम में भूजल स्तर नीचे जाने के कारण पेयजल की समस्या उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। केवलारी क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानों की तुलना में छींदा में बड़े नदी-जलाशयों के सीमित विकल्प होने के कारण स्थानीय जलस्रोतों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

ग्राम पंचायत की नल-जल योजना के कुएं के पास स्थित नाला तथा श्री राधा-कृष्ण मंदिर का तालाब ऐसे जलस्रोत हैं, जिनमें पानी का पर्याप्त संग्रहण गांव के लिए उपयोगी हो सकता है। यदि इन स्रोतों में उपलब्ध पानी का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए और जल संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं, तो गर्मी के दिनों में पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

img-20261026-wa0017-6adf874314114.webp

कुछ किसानों की मोटरें मिलीं, समझाइश से निकला समाधान

24 अक्टूबर को किए गए निरीक्षण के दौरान नल-जल योजना के कुएं के समीप नाले में सिंचाई के लिए कुछ किसानों की मोटरें पाई गईं। मामले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चर्चा की गई। चूंकि यह पहला अवसर था, इसलिए आपसी सहमति और समझाइश के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया गया।

किसानों को बताया गया कि नाले और आसपास के जलस्रोतों में उपलब्ध पानी केवल सिंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि गांव की पेयजल जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उन्हें समझाइश दी गई कि भविष्य में इस जलाशय से सिंचाई करने के लिए मोटरें नहीं लगाएं, ताकि जलस्रोत में पानी का संरक्षण किया जा सके और आने वाले गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस दौरान किसी प्रकार के टकराव के बजाय संवाद और सामूहिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी गई। ग्रामीणों से भी अपेक्षा की गई कि वे जल संरक्षण के इस प्रयास में सहयोग करें और दूसरों को भी पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करें।

नाले में पानी रोकने के उपायों पर भी हो विचार

स्थानीय स्तर पर यह सुझाव सामने आया है कि नाले में पानी का संग्रहण बढ़ाने के लिए मिट्टी का अस्थायी बांध बनाया जा सकता है। यदि तकनीकी रूप से उपयुक्त हो और संबंधित विभागों की अनुमति प्राप्त हो, तो ऐसे उपाय जल संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन, जलस्रोतों की सफाई और भूजल पुनर्भरण जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

पेयजल के लिए उपलब्ध पानी को सुरक्षित रखने के साथ-साथ किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित विभागों के सहयोग से वैकल्पिक जलस्रोतों और सिंचाई के उपयुक्त विकल्पों पर चर्चा की जा सकती है, जिससे खेती का काम भी प्रभावित न हो और गांव की पेयजल जरूरतें भी सुरक्षित रहें।

पंचायत, ग्रामीण और प्रशासन मिलकर बचाएं गांव का पानी

निरीक्षण एवं चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत सचिव मनोहर ठाकुर, उपसरपंच राजकुमार उर्फ बम्मू यादव, पंचगण और ग्राम कोटवार अखिलेश झारिया सहित संबंधित लोग मौजूद रहे। पंचायत की ओर से मामले की जानकारी जनपद पंचायत केवलारी, छींदा-केवलारी पुलिस तथा संबंधित विभागों के संज्ञान में लाने की बात कही गई है।

छींदा में पेयजल संरक्षण का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय समस्याओं का समाधान संवाद, समझाइश और सामूहिक सहमति से भी निकाला जा सकता है। गांव के जलस्रोतों को बचाने की जिम्मेदारी केवल पंचायत की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है।

संदेश स्पष्ट है—खेती भी जरूरी है और पेयजल भी, लेकिन पीने के पानी की उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। समय रहते जलस्रोतों का संरक्षण किया गया, तो गर्मी के दिनों में संभावित पेयजल संकट को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए पंचायत, किसानों, ग्रामीणों और संबंधित विभागों का आपसी सहयोग ही सबसे प्रभावी रास्ता है।

Live

लाइव क्रिकेट Score

Live

दैनिक राशिफल Daily

ज्योतिष

जरूरी खबरें