क्राइमछिंदवाड़ासिवनी

शर्मसार हुई ममता: शिक्षक पिता ने नौकरी जाने के डर से 3 दिन के नवजात को जंगल में फेंका

अमरवाड़ा के नांदनवाड़ी गाँव की घटना, ग्रामीणों की सतर्कता से बची मासूम की जान

हर्रई (छिंदवाड़ा) यशो: –  जिले के अमरवाड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम नांदनवाड़ी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। यहां एक शिक्षक पिता ने नौकरी बचाने की हवस में अपने ही 3 दिन के मासूम बेटे को जंगल में लावारिस छोड़ दिया। मासूम 20 घंटे तक पत्थरों के नीचे दबा रहा, चींटियों और कीड़ों से घिरकर तड़पता रहा, लेकिन जिंदगी से चिपका रहा। गनीमत रही कि ग्रामीणों ने उसके रोने की आवाज सुनी और पुलिस को सूचना दी। 

नौकरी का खौफ बना दरिंदगी की वजह

धनोरा चौकी पुलिस के अनुसार 23 सितंबर की रात सरकारी शिक्षक बबलू डांडोलिया और उसकी पत्नी राजकुमारी डांडोलिया ने चौथी संतान के जन्म को छिपाने की साजिश रची। विभागीय नियमों के तहत तीसरी संतान होने पर नौकरी समाप्ति का डर उन्हें सता रहा था। नौकरी के डर से उन्होंने 25 सितंबर की रात नवजात को जंगल में पत्थरों के नीचे दबाकर छोड़ दिया।

मंत्री के हस्तक्षेप से मंडला में रुका था शोषण, छिंदवाड़ा में फिर दोहराई गई संवेदनहीनता

जनजातीय कार्य विभाग के नियमों के चलते तीसरी संतान वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने और नोटिस जारी करने का सिलसिला कई जिलों में चल रहा है। मंडला जिले में भी इसी तरह कर्मचारियों को शोषण और भयभीत करने की शिकायतें उठीं। वहां प्रताड़ित कर्मचारियों ने अपनी समस्या प्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उईके के सामने रखी थी। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर ऐसे अन्यायपूर्ण नोटिसों पर रोक लगवाई थी।

लेकिन छिंदवाड़ा जिले में अब भी इन्हीं नियमों का खौफ दिखाकर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। इसी दमनकारी माहौल ने अमरवाड़ा जैसे हृदयविदारक कांड को जन्म दिया।

जंगल से मिला नवजात, चींटियों के निशान से भरा शरीर

अगले दिन ग्रामीणों ने बच्चे के रोने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे तो यह दृश्य सामने आया।

बच्चे के शरीर पर चींटियों व कीड़ों के निशान थे।

तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई।

बच्चे को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनोरा और फिर जिला अस्पताल रेफर किया गया।

डॉक्टरों ने फिलहाल बच्चे को खतरे से बाहर बताया है।

डीएनए टेस्ट से होगी पुष्टि, दंपति गिरफ्तार

धनोरा चौकी प्रभारी लखनलाल अहिरवार ने बताया कि –

बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है।

आरोपी शिक्षक बबलू डांडोलिया और उसकी पत्नी राजकुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गांव और समाज आक्रोशित

बीआरसी अमरवाड़ा विनोद वर्मा ने कहा –

“ऐसा कृत्य समाज के लिए कलंक है।

आरोपी शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्यवाही होनी चाहिए।”

ग्राम नांदनवाड़ी के ग्रामीणों ने मांग की है कि इस अपराधी शिक्षक पर उदाहरणात्मक कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई माता-पिता अपने ही बच्चों के साथ ऐसी दरिंदगी न कर सके।

मानवता और कानून के बीच संतुलन का सवाल

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सोच पर सवाल खड़े करती है।

जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है,

लेकिन अगर उसके डर से मां-बाप अपने ही बच्चों को मारने या छोड़ने लगें तो क्या ऐसे नियम अपने उद्देश्य से भटकते नहीं दिखते?

https://mahamedianews.com/india-news/news/people-with-three-children-cannot-hold-government-jobs-in-madhya-pradesh-

Dainikyashonnati

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