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सरकार का पूरा सिस्टम बौना, ठेकेदार के रसूख के सामने, आपत्ति करने पर अधिकारी का हो जाता है तबादला
52 हजार के काम के ठेकेदार चाहता है 27 लाख, अधिकारी की आपत्ति पर उसका करा दिया तबदला
गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर कार्रवाई करने वाले एसडीओ का तबादला, बौखलाए ठेकेदारों की दबंगई उजागर
Seoni 07 June 2025
सिवनी यशो :- लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत एक ईमानदार अधिकारी को तबादले के रूप में चुकानी पड़ी। केवलारी में घटिया सड़क निर्माण कार्यों पर सख्ती बरतने वाले एसडीओ श्री चौकसे का बिना कारण तबादला कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के पीछे रसूखदार ठेकेदारों और कुछ उच्च अधिकारियों की मिलीभगत है।
केवलारी और उगली मार्ग पर घटिया डामरीकरण तथा डोभ-खरसारू मार्ग पर मानकों से परे सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच के बाद एसडीओ श्री चौकसे ने ठेकेदारों को नोटिस जारी किए और तकरीबन 2 किलोमीटर घटिया सड़क को उखड़वाकर लाखों रुपये के बिलों में कटौती की। इससे बौखलाए ठेकेदारों ने अपनी राजनीतिक पकड़ का उपयोग करते हुए ईमानदार अधिकारी का तबादला करवा दिया।
अब ठेकेदारों के हित में एक सब-इंजीनियर को प्रभारी एसडीओ नियुक्त कर दिया गया है, जिससे विभागीय निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नए प्रभारी द्वारा ठेकेदारों के हित में पहले की गई कटौतियों को पलटने की तैयारी की जा रही है।
विधायक मुनमुन राय ने उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर सिवनी के भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए इस तबादले को द्वेषपूर्ण और ईमानदारी के खिलाफ साजिश बताया। विधायक ने पत्र में आरोप लगाया है कि ठेकेदारों द्वारा बिना सफाई के सड़क पर डामरीकरण किया गया, जिसे एसडीओ चौकसे ने निरस्त किया था। गुणवत्ता खराब होने के चलते ?27 लाख के बिल की जगह मात्र ?52 हजार का भुगतान किया गया।
इसी प्रकार डोभ-खरसारू मार्ग में बिना प्लांट के घटिया सीसी रोड का निर्माण हुआ, जिस पर ए.जी.एम.पी. ग्वालियर द्वारा भी आपत्ति जताई गई थी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ?8 लाख का अतिरिक्त भुगतान लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
विधायक ने की ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
विधायक मुनमुन राय ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और स्थानांतरित किए गए ईमानदार अधिकारी की पुन: बहाली की जाए। साथ ही, घटिया बनी सड़क को उखड़वाकर नई सीसी सड़क के निर्माण की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे ईमानदार अधिकारियों को दंड और भ्रष्टों को इनाम मिलता रहा, तो जनता सरकार की ईमानदारी पर कैसे विश्वास करेगी?
क्या सरकार लेगी सख्त फैसला या फिर भ्रष्टों का ही पलड़ा रहेगा भारी?
अब देखना यह है कि क्या भाजपा सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेगी या फिर हमेशा की तरह दबाव में आकर भ्रष्टाचार को ही प्रश्रय देती रहेगी।






