छिंदवाड़ामध्यप्रदेशसिवनी

रेडियो के लिए सेटेलाईट छोडऩे की जरूरत हिन्दी के प्रसार-प्रचार का श्रेष्ठ माध्यम होगा

गोविन्द चौरसिया

Chhindwara 13 February 2025
सिवनी यशो:- आज विश्व रेडियो दिवस हे, रेडियो मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन है, टेलिविजन के आने के बाद इसका महत्व कम हो गया क्योकि जिस घर में टी.व्ही.होगा वहां रेडियो नहीं होगा, मोबाईल मे भी टी.व्ही. के चेनल एवं रेडियो है, किन्तु उसके बाद भी आज रेडियो की अपनी महत्ता है।
टी.व्ही. नहीं था तब रेडियो होते थे, रेडियो में 3 बैन्ड होते थे, अब रेडियो में एफ एम बैन्ड भी है, जो स्थानीय श्रोताओं के लिए ही रहता है, रेडियो की आवाज ग्रामीण क्षेत्रों में सुनी जाती है। रेडियो में विविध भारती आता है, जो एफ एम बैण्ड के माध्यम से सुना जाता है, जिसमें समाचार, आने एवं महत्वपूर्ण जानकारियां श्रोताओं को मिलती है।
आज भी जो रेडियो निर्माता है वे एफ.एम. के साथ शार्टवेव एवं मीडिया बेव रहते है किन्तु रेडियो में सिर्फ एफ.एम. रेडियो ही बजता है जहां पर एफ एम बैण्ड के रेडियो स्टेशन है वहां ही रेडियो बजता है, किन्तु बाकी दो बैण्ड में कोई कार्यक्रम नहीं आते।
श्रोताओं को याद होगा कि पहले रेडियो सीलोन में बिनाका गीत माला, बी.बी.सी लन्दन एवं अन्य स्टेशन में कार्यक्रम आते थे, जिसकी जबर्दस्त लोक प्रियता थी इसके अलावा विदेशों के कई चेनल आते थे, जिससे समाचार एवं अन्य जानकारियां मिलती थी।
रेडियो में मीडियम एवं शार्ट वेेव के सभी स्टेशन प्रारम्भ हो जावे तो कई तरह के कार्यक्रम रेडियो आने लगेंगे। रेडियो का सबसे बड़ा फायदा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
सरकार छोटे-छोटे एफ.एम. रेडियो स्टेशन के स्थान पर एक सेटेलाईट रेडियो प्रसारण के लिए छोड़ा जावे, जो देश के कोने-कोने में प्रसारण करेगा।
आज भी देश के कई हिस्सो में हिन्दी बोली एवं समझी नहीं जाती। हिन्दी को सीखना आसान है क्योकि वह बोलचाल की भाषा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रेडियो के लिए सेटेलाईट छोड़ रेडियो के बैण्ड प्रारम्भ करने हेतु कई पत्र भी लिखे गये है, किन्तु सरकार ने ध्यान नही दिया। कहा जा सकता कि सरकार को हिन्दी के प्रसार-प्रचार के लिए सेटेलाईट छोडऩा चाहिये, विदेशो के सभी स्टेशनों को चालू करना चाहिये, इस माध्यम से विदेशी भाषा भी घर बैठे सीखा जा सकता है।
रेडियो के सभी बैण्ड एवं स्टेशन प्रारम्भ होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभायें निखारने का मौका मिलेगा।
सरकार रेडियो के लिए सेटेलाईट छोडेगी तो देश के कोने-कोने में रेडियो की आवाज पहुंचेगी श्रोताओं को याद होगा चीन में बना एफ एम रेडियो जो पाकेट ट्रान्सजिस्टर कहलाता था 60 रूपए में मिलता था और कोई भी जेब में रखकर अपना मनोरंजन करता था सभी रेडियो स्टेशन प्रारम्भ होने से रेडियो का उत्पादन भी बढेगा जिससे रोजगार भी पैदा होगा।
विश्व रेडियो दिवस पर सरकार एवं श्रोताओं को बधाई शुभकामानायें।

Dainikyashonnati

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