सिवनी में विश्व के प्रथम 108 चरण चिन्ह की प्रतिष्ठा, मुनि श्री भावसागर जी महाराज की आंखों में छलक पड़े आंसू
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर सिवनी में पहली बार एक साथ 108 आचार्य श्री की 108 पूजन संपन्न, धर्मसभा में उमड़ा आस्था का सागर
Seoni 22 August 2025
सिवनी यशो:- सिवनी के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आज इतिहास रचा गया। यहाँ विश्व के प्रथम चरण चिन्ह की प्रतिष्ठा और एक साथ 108 आचार्य श्री की 108 पूजन संपन्न हुई।
यह दिव्य आयोजन परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज और परम पूज्य मुनि श्री भावसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य तथा ब्रह्मचारी मनोज भैया (जबलपुर) के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। प्रातः बेला में अभिषेक-शांतिधारा, अष्टकुमारियों द्वारा चरणचिन्ह की शुद्धि और मंगल क्रियाएँ की गईं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्ह के मोमेंटो का भी अनावरण किया गया। इस पावन क्षण पर जब मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने गुरु की महिमा का वर्णन किया तो उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े। सभा में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।
धर्मसभा में मुनि श्री भावसागर जी का प्रवचन
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु पुष्य नक्षत्र में गुरु भक्ति का अनुष्ठान करना सौभाग्य की बात होती है।
उन्होंने कहा—
-
गुरु की कृपा से सभी कार्य सफल हो जाते हैं।
-
मेरी भावना है कि गौशालाओं में भी गुरु चरण चिन्ह स्थापित होना चाहिए।
-
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज शब्दों के जादूगर और अनुशासन की जीवंत मूर्ति थे।
-
उन्होंने कई विश्व रिकॉर्ड बनाए और हजारों शिष्यों का मार्गदर्शन किया।
मुनि श्री ने बताया कि आचार्य श्री के शिष्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर, विदेश की सेवाएँ छोड़कर दीक्षा मार्ग पर चले। उनके प्रवचनों से अनगिनत लोगों ने मांसाहार और नशे का त्याग किया।
उन्होंने कहा— “गुरु ही शिष्य के बुझ चुके दीप को प्रज्वलित कर सकते हैं और मोक्ष का ताला खोलना सिखाते हैं।”
आचार्य श्री विद्यासागर जी की महिमा
-
आचार्य श्री के दर्शन और प्रवचन सुनने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जज, साहित्यकार, शिक्षाविद और उद्योगपति भी पहुँचते थे।
-
उनकी साधना और आशीर्वाद से चमत्कारिक घटनाएँ घटित होती थीं, जैसे पंचकल्याणक में जलस्रोत प्रकट होना।
-
पूज्य ज्ञानसागर जी महाराज ने स्वयं स्वीकार किया था कि विद्यासागर जी महाराज में गुणों की अपार संपदा थी।




One Comment