प्रयागराज का यह कुंभ लगभग 45 दिनों तक रहेगा, आज पहला शाही स्नान
पं. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवता और दानवों ने मिलकर समुद्रमंथन किया जब चौंदवें रत्न के रूप में धनवंतरी जी अमृत कलश लेक र प्रकट हुये,तब ” पहले अमृत हम ग्रहण करेंगे ” ऐसा कहकर आपस में वाद विवाद करने लगे। इसी समय दानव लोग अमृत कलश (कुंभ)लेकर भागे। इस छीना छपटी में चार जगह हरिद्वार, नासिक, उज्जैन एवं प्रयागराज में अमृत की बूंदें गिरीं, जहाँ पर प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ पर्व लगता है, कुंभ स्नान होता है। ऐसा माना जाता है कि,जो व्यक्ति कुंभ स्नान करता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।
।। माघ मकर गति रवि जब होई,तीरथ पतिहिं आव सब कोई।।
सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है और गुरू जब वृष राशि में रहता है तब प्रयागराज में कुंभ पर्व लगता है। इस पर्व में देव दानव,यज्ञ,गन्धर्व सहित ब्रम्हा,विष्णु,महेश का भी अपने अपने-अपने लोक से स्नान करने आते हैं तथा पृथ्वी लोक से साधु सन्यासी, महात्मा,तपस्वी,योगी,वैरागी तेरह अखाडेÞ चारों शंकराचार्य सहित ग्रहस्थजन इस गंगा जमुना सरस्वती नदी संगम पर स्नान कर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
प्रयागराज का यह कुंभ लगभग 45 दिनों तक रहेगा,यह पौष शुक्ल पूर्णिमा 13 जनवरी से प्रारंभ होकर फ ाल्गुन कृष्ण पक्ष अमावश्या 24 फरवरी तक विद्यमान रहेगा। जिसमें तीन शाही स्नान एवं 7 समान्य स्नान पर्व रहेगा।
शाही स्नान पर्व पर अखाड़ों की पेशवाई स्नान होगा,शंकराचार्यों,महामंडलेश्वरों सहित अन्य साधु संतों का प्रथम स्नान होगा,उसके पश्चात आमजनों को स्नान संगम तट पर प्राप्त होगा,सामान्य स्नान पर्व एवं अन्य दिनों में सभी को आसानी से स्नान का लाभ प्राप्त होगा। अत: आमजन भीड़ भाड़ से बचें सामान्य दिनों में स्नान का लाभ प्राप्त करें। ऐसा अनुमान है कि प्रति दिन एक करोड भक्तजनों के स्नान करने की व्यवस्था बनाई गई है। संपूर्ण कुंभ स्नान स्थल कों चार जोन में बांटा गया है जो जिस रास्ते से आयेगा उसी रास्ते से वापस जायेगा। उसे क्रास नहीं करने दिया जायेगा इससे भगदड से बचा जा सकेगा। संगम स्थल पर बहुत ही सख्त व्यवस्था रहेगी,यहाँ पर साधु संतों के अलावा वीआईपी जन ही स्नान कर पायेंगे। भक्तों को गंगा जी एवं यमुना जी में ही स्नान लाभ प्राप्त होगा। अत: सब ग्रहस्थजन 28 फरवरी से 13 मार्च के मध्य में जाकर संगम पर स्नान कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
प्रयागराज के आसपास के जिलों में भी प्रसिध्द दर्शनीय स्थल है जहाँ पर दर्शन लाभ प्राप्त किया जा सकता है। प्रयागराज से 120 किलोमीटर पूर्व दिशा की तरफ काशी वाराणसी पड़ता है। जहाँ पर काशी विश्वनाथ सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किया जा सकता है। इसी प्रकार मिर्जापुर जिले में विंध्यवासनी देवी का प्रसिध्द मंदिर है,भदोही जिले में सीतामढ़ी है जहाँ पर माँ सीता पृथ्वी में समाहित हो गई थीं,प्रयागराज से 100 किलोमीटर दूरी पर अयोध्या धाम है जहाँ पर रामलला सरकार के दर्शन कर सकते हैं। चित्रकूट,कडेमनीपुर में शीतला देवी,गोरखपुर में गोरखपीठ सहित अन्य अनेक धार्मिक तीर्थ स्थल हैं जो कि 100-150 किलोमीटर रेंज में विद्यमान है। जहाँ आप कुंभ स्नान कर इन जगहों पर दर्शन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रयागराज में कुंभ पर्व पर स्नान करने जाते समय खाने-पीने का सूखा समान व ठंड से बचने के लिये कम्बल अवश्य लेकर जायें,क्योंकि, वहाँ ठंड बहुत पडती है रात्रि निवास करने के लिये आस पास के जिलों में प्रयास करें खासकर बनारस में । प्रयागराज से रूकने की अच्छी व्यवस्था नहीं मिल पायेगी साधु महात्माओं के पंडालों पर मिल सकती है।
सहस्त्रं कार्तिके स्नानं माघे स्नान शतानि च।। वैशाखे नर्मदा कोटि: कुंभ स्नाने तत्फलम।।
अर्थात कार्तिक मास में 1000 बार गंगा स्नान करने से माघ में 100 गंगा स्नान करने से वैशाख में 1 करोड़ नर्मदा स्नान करने से जो फल मिलता है वही फल प्रयागराज में कुंभ पर्व पर एक बार स्नान से मिलता है।
शाही स्नान पर्व
14 जनवरी 2025 मकर संक्रांति पहला शाही स्नान,29 जनवरी 2025 बुधवार मौनी अमावश्या द्वितीय शाही स्नान,2 फरवरी 2025 रविवार बसंत पंचमी तृतीय शाही स्नान, सामान्य स्नान पर्व -13 जनवरी 2025 पौषी पूर्णिमा माघ स्नान प्रारंभ कुंभ स्नान प्रारंभ,17 जनवरी 2025 गणेश चतुर्थी,25 जनवरी 2025 षटतिला एकादशी,4 फरवरी 2025 भानू सप्तमी,8 फरवरी 2025 जया एकादशी,12 2025 फरवरी माघी पूर्णिमा,26 फरवरी 2025 महाशिरात्रि।





